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प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों के भवन निर्माण तथा ट्रेनिंग हाॅल आदि के निर्माण हेतु 2284.7784 लाख रुपये का प्रस्ताव

श्री आलोक रंजन ने आउट आॅफ स्कूल बच्चों को मुख्य धारा से जोड़ने हेतु समस्त जनपदों में शिक्षकों के माध्यम से कराये गये हाउस होल्ड सर्वे का डाटा संकलित कर चिन्हित आउट आॅफ स्कूल बच्चों का नामांकन कराकर उन्हें विशेष प्रशिक्षण प्रदान किये जाने के निर्देश दिये। उन्होंने कहा कि प्रदेश के पेयजल विहीन एवं शौचालय विहीन समस्त प्राथमिक/उच्च प्राथमिक विद्यालयों में स्वच्छ पेयजल एवं शौचालय की व्यवस्था कराया जाना सुनिश्चित किया जाये। उन्होंने कहा कि शारीरिक रूप से अक्षम बच्चों को आवश्यकतानुसार फिजियोथेरेपी देने हेतु माह अक्टूबर, 2015 से मेडिकल एसेसमेंट कैम्पों का आयोजन कराया जाये। उन्होंने जिन जनपदों में विद्यालयों के निर्माण हेतु मानक के अनुसार भूमि उपलब्ध नहीं है, उन जनपदों के जिलाधिकारियों से भूमि अनुपलब्धता प्रमाण-पत्र प्राप्त कर बस्तियों के बच्चों के पठन-पाठन हेतु उचित वैकल्पिक व्यवस्था कराई जाये।
मुख्य सचिव आज यहां शास्त्री भवन स्थित अपने कार्यालय कक्ष के सभागार में सर्व शिक्षा अभियान की कार्यकारी समिति की बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने विभिन्न जनपदों के प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों के भवन निर्माण तथा ट्रेनिंग हाॅल आदि के निर्माण हेतु 2284.7784 लाख रुपये के समिति द्वारा प्रस्तुत किये गये प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान करते हुये इन निर्माण कार्यों को निर्धारित समय में निर्धारित मानक एवं गुणवत्ता के साथ कराने के निर्देश दिये। प्रस्ताव में जनपद वाराणसी, बलरामपुर, सुल्तानपुर, गोण्डा एवं रायबरेली में 303 प्राथमिक विद्यालयों के भवनों के निर्माण हेतु 1944.61 लाख रुपये की तथा जनपद वाराणसी एवं रायबरेली में 21 उच्च प्राथमिक विद्यालयों के भवनों के निर्माण हेतु 235.8504 लाख रुपये की धनराशि शामिल है। इसी प्रकार प्रस्ताव में जनपद कुशीनगर, बहराइच, रामपुर, देवरिया में बी0आर0सी0 ट्रेनिंग हाॅल के निर्माण हेतु 43.51 लाख रुपये तथा जनपद आगरा, लखीमपुर खीरी, फिरोजाबाद, सुल्तानपुर के कम्पोजिट स्कूल के भवन निर्माण हेतु 66.408 लाख रुपये की धनराशि शामिल है।
श्री रंजन ने छात्र-छात्राओं को बेहतर एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दिलाने के साथ-साथ उनके सर्वांगीण विकास के उद्देश्य से शिक्षकों को नैतिक शिक्षा का प्रशिक्षण कराने के निर्देश दिये हैं। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण प्राप्त करने के उपरान्त शिक्षक तनावमुक्त होकर बच्चों में सामाजिकता, नैतिकता एवं मानवीय गुणों का विकास और बेहतर ढंग से करेंगे। उन्होंने कि बच्चों को पठन-पाठन हेतु उपलब्ध करायी जाने वाली पाठ्य पुस्तकों का परीक्षण कराकर उन्हें और बेहतर बनाया जाये।
बैठक में प्रमुख सचिव बेसिक शिक्षा श्रीमती डिम्पल वर्मा सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
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