Thursday, October 1, 2020
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योगगुरू स्वामी रामदेव जी महाराज, श्री श्री रविशंकर जी महाराज, स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज की त्रिवेणी ने त्रिवेणी संगम पर कराया योग

संगम के तट पर संगम

परमार्थ निकेतन, भारतीय योग संस्थान और पतंजलि योगपीठ के संयुक्त तत्वाधान में उत्तरप्रदेश सरकार, अतुल्य भारत और कुम्भ मेला प्रशासन के सहयोग से परमार्थ निकेतन शिविर, प्रयागराज में सात दिवसीय योग महाकुम्भ का आयोजन

पतंजलि योगपीठ, परमार्थ निकेतन, आर्ट आॅफ लिविंग, कृष्णामाचार्य योग संस्थान, कैवल्यधाम, व्यासा, योग विद्या गुरूकुल, एम. डी. एन. आई. वाय. संस्थान, श्री रामचन्द्र मिशन, द योगा इस्टीट्यूट, श्री मोहन संस्थान तथा भारत की 32 से अधिक विख्यात योग संस्थानों के योगाचार्यों और हजारों योग जिज्ञासुओं ने किया सहभाग*

सरकार ने सेल्फी प्वाइंट बनाया संतों ने बनाया सेल्फ प्वांइट-स्वामी चिदानन्द सरस्वती

चैतन्य जागे तो आनन्द ही आनन्द

योग क्रान्ति सारी क्र्रान्तियों का मूल-श्री श्री रविशंकर
एक-दूसरे के सहयोगी बने, उपयोगी बने और योगी बने-योगगुरू रामदेव

प्रयागराज/ऋषिकेश Ap3 – परमार्थ निकेतन शिविर मंे संगम के तट पर योगगुरू स्वामी रामदेव जी महाराज, विख्यात आध्यात्मिक गुरू श्री श्री रविशंकर जी महाराज, परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज, श्रीराम कथा वाचक श्री मुरलीधर जी महाराज, गोस्वामी पुण्डरीक जी महाराज, पोलैंड से पधारे इन्द्रप्रद्युम्नदास जी महाराज, स्वास्थ्य राज्य मंत्री श्रीमती स्वाति सिंह जी, जीवा की अन्तर्राष्ट्रीय महासचिव साध्वी भगवती सरस्वती जी, श्री राकेश जी के पावन सान्निध्य और मार्गदर्शन में हजारों योग साधकों और गुरूकुल के ऋषिकुमारो ने योगाभ्यास और प्राणायाम की विभिन्न विधाओं का अभ्यास किया।


परमार्थ निकेतन शिविर में आध्यात्मिक गुरू श्री श्री रविशंकर जी महाराज, परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज और साध्वी भगवती सरस्वती जी ने सत्संग, ध्यान के पश्चात श्रद्धालुओं की जिज्ञासाओं का समाधान किया।
श्री श्री रविशंकर जी महाराज ने कहा कि, स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने सामाजिक समस्याओं को आध्यात्मिक दृष्टिकोण से ठीक करना सिखाया है तथा उनके द्वारा क्रान्तिकारी विचारों को सनातन संस्कृति के साथ ले जाना बहुत ही अद्भुत प्रयास है उन्होने भारतीय अध्यात्म परम्परा को दुनिया में पहुंचाया। उन्होने कहा कि चैतन्य जागे तो आनन्द ही आनन्द। कुम्भ नगरी में आकर भक्ति, कर्म और ज्ञान के संगम में डुबकी लगाये। ज्ञान, भक्ति एवं कर्म ही त्रिवेणी संगम है। मनुष्य के जीवन में इनमें से कोई एक चीज भी न हो तो बात नहीं बनेगी, जब ये तीनों होेंगे तब ही जीवन में पूर्णता होगी। मन की स्वच्छता के साथ देश को स्वच्छ रखे, शरीर स्वस्थ रहे, समाज सुरक्षित रहे, पर्यावरण स्वच्छ रहे और मन में प्रसनन्ता रहे यही जीवन का लक्ष्य होना चाहिये। सरलता और सहजता में ही परमात्मा का वास होता है।


परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि संगम के तट पर आज सचमुच संगम योग का दर्शन हो रहा है। दिव्य योग और भव्य योग ही संगम योग है। इसी तरह के संगम का, समरसता का, सद्भाव का और एकता का दर्शन करने ही तो लोग कुम्भ में आते है। स्वामी जी ने कहा कि संगम में स्नान करे लेकिन संत संगम में भी स्नान करे। आज पूरे देश को एक संगम की जरूरत है। इस देश का संगम जिंदा रखने के लिये अनेकता में एकता को बनायें रखना होगा। देश की हर धारा जब साथ मिलकर कार्य करेंगी तो समग्र, सम्पूर्ण, सतत और सुरक्षित विकास सम्भव हो सकेगा।


संगम के तट पर कोई भी आता है तो वह न राजा न रंक, न छोटा न बड़ा सबकी डुबकी लगती है। यहां बात हस्ती की नहीं बल्कि भीतर की मस्ती की होती है। भीतर का संगम भीतर की मस्ती ही सचमुच सच्चा आनन्द है। स्वामी जी ने कहा कि जिसकी मस्ती जिंदा है उसकी हस्ती जिंदा है बाकी तो सब जबरदस्ती जिंदा है।


योगगुरू स्वामी रामदेव जी महाराज ने कहा कि हम सभी एक-दूसरे के सहयोगी बने, उपयोगी बने और योगी बने। अज्ञान, अश्रद्धा और अर्कमण्यता को दूर करना ही योग है। योग तो आत्मनिर्माण से विश्व जागरण की यात्रा है। उन्होने भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी और उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ को धन्यवाद देते हुये कहा कि करोड़ों के मेले में इतनी स्वच्छता की व्यवस्था पहली बार दिखायी दे रही है। स्वामी जी महाराज ने कहा कि श्री राम मन्दिर निर्माण के साथ श्री राम और माता सीता जैसे अपने चरित्र का निर्माण भी करे।
साध्वी भगवती सरस्वती जी ने कहा कि पूज्य संतों के सत्संग से हमारा संगम स्नान हो गया। सचमुच गुरू की उपस्थिति में हमें जो लाइट मिलती है वह विलक्षण है। गुरू हमारे अन्धकार को दूर करते है और हमें प्रकाश देते हैं। गुरू प्रदत यह प्रकाश को अपने साथ लेकर जाये इससे आप जहां-जहां जायेंगे वहीं पर आपका संगम स्नान होगा। संगम में जीना ही संगम स्नान है इससे भीतर का संगम बना रहेगा। सत्संग का मतलब है सत्य के साथ रहना। उन्होने कहा कुम्भ, अमृत का पर्व है चाहे आप संगम में स्नान करो या सत्संग में स्नान करो यही सत्य में स्नान करना है।
आज के योग सत्र में भारत सहित आस्ट्रेलिया, पेरू, कोलम्बिया, अमेरिका, साइबेरिया, कनाडा, मलेशिया, नेपाल, नार्वे, स्पेन, इन्डोनेशिया, तिब्बत, कम्बोडिया, श्रीलंका, थाइलैंड, ब्राजील, जमर्नी, जापान, सिंगापुर, क्रोवाशिया, अर्जेन्टीना, मेक्सिको, हाॅलैैण्ड और विश्व के अन्य देशों के योग साधकों ने किया सहभाग।