Saturday, August 24, 2019
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प्रसव के दौरान मृत्यु का अनुपात कम करना एक बड़ी चुनौती

प्रसवोत्तर मृत्यु एवं मरणोपरांत जन्म : एक चुनौती या स्वास्थ्य प्रणाली की उदासीनता ‘ विषय पर संगोष्ठी

लखनऊ संवाददाता – गर्भवती माताओं की प्रसव के दौरान मृत्यु का अनुपात कम करना एक बड़ी चुनौती है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा लगातार किये जा रहे प्रयासों का नतीजा है कि मातृत्व मृत्यु दर में गिरावट है। बोरा इंस्टीट्यूट आॅफ एलाइड हेल्थ साइंसेज व इंडियन काउंसिल आफ मेडिकल रिसर्च, नई दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में सोमवार को बृज की रसोई में ‘ प्रसवोत्तर मृत्यु एवं मरणोपरांत जन्म : एक चुनौती या स्वास्थ्य प्रणाली की उदासीनता ‘ विषय पर आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में वक्ताओं ने कहीं। संगोष्ठी में वक्ताओं ने प्रसूति काल की पूर्ण जानकारी, रक्त प्रवाह, थायराइड की समस्या एवं प्रसूतिकाल में स्तनपान की समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की।

 

मुख्य अतिथि केजीएमयू के यूरोसर्जरी विभाग के प्रोफेसर डॉ विनोद जैन ने कहा कि भारतवर्ष में महिलाओं के बीच सुरक्षित प्रसव आज भी एक चुनौती है। प्रसव के दौरान प्रसूता की मौत का आंकड़ा लगातार भयानक बना हुआ है। इसका कारण यह है कि ज्यादातर प्रसव आज भी सुशिक्षित डाक्टरों के हाथों नहीं बल्कि स्थानीय नर्सों, दाईओं के हाथों सम्पन्न होते हैं।

 

उन्होंने कहा है कि हमें इस दिशा में और ज्यादा काम करने की जरूरत है। काॅलेज निदेशक बिन्दू बोरा ने कहा कि जननी सुरक्षा योजना, जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम और प्रधानमंत्री मातृत्व सुरक्षा अभियान की लगातार निगरानी और अनुश्रवण का परिणाम है कि मातृ मृत्यु अनुपात में कमी आयी है। संगोष्ठी में बोरा इंस्टीट्यूट आफ एलाइड हेल्थ साइंसेज की एसोसिएट प्रोफेसर अर्जिता सेंगर, एसजीपीजीआई की एसोसिएट प्रोफेसर भूमिका सिंह, केजीएमयू की एसोसिएट प्रोफेसर रीना राज, सहायक प्रोफेसर ऐमन फातिमा ने भी सम्बंधित विषय पर विचार रखे। कार्यक्रम में मुख्य रूप से प्राचार्य डा. नीता कपूरिया, प्रशासनिक अधिकारी सुधांशू मिश्रा, उपप्राचार्य अनीस मोहन, एवं भारी संख्या में नर्सिंग कालेज के छात्र-छात्राएं उपस्थित रही।

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