Monday, July 22, 2019
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समुद्र से संभावित दवाओं, समुद्र से औषधि के विकास के लिए हुआ समझौता

सीडीआरआईए और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने किया समझौता
लखनऊ Ap3 न्यूज़- सीएसआईआर.सीडीआरआईए लखनऊ और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय, भारत सरकार ने एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। इस एमओयू (दस्तावेज़) का आदान प्रदान सीएसआईआ.सीडीआरआई के निदेशक प्रोफेसर तपस कुमार कुंडू एवं पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से संयुक्त सचिव विपिन चंद्रा ने किया।

इस अवसर पर डॉ चंद्रा ने कहा कि अपने 8000 किमी के समुद्र तट के साथ भारत एक समृद्ध समुद्री जीव.जन्तु एवं वनस्पति से संपन्न देश है। भारतीय समुद्र विविध वनस्पतियों और जीवों का एक विशाल भंडार है। जिसे उसके व्यावसायिक उपयोग के नजरिए से व्यवस्थित रूप से नहीं देखा गया है। हालांकि समुद्री जीवों जैसे कि स्पंज, मूंगा, मोती, सीप आदि का आयुर्वेद और सिद्ध चिकित्सा पद्धतियों में प्राचीन समय से उपयोग किया जा रहा है। आधुनिक चिकित्सा प्रणाली के समुद्र से उत्पन्न उत्पादों के औषधीय गुणो का वैज्ञानिक विश्लेषण होना अभी बाकी है।इस समझौते पर हस्ताक्षर समारोह के दौरान निदेशक सीएसआईआर.सीडीआरआई ने बताया कि संस्थान पूरे देश के अन्य भागों से समुद्र से उत्पन्न उत्पादों के नमूनों, एन्टीकैंसर, एन्टीइन्फ़्लेमेट्रि, जीवाणुरोधी और एंटीफंगल एंजियोजेनिक, स्टेम सेल विभेदन और कई अन्य रोगों से संबन्धित जैवविज्ञानिक विश्लेषण कर उनकी औषधि निर्माण में उपयोगिता का आंकलन इस परियोजना के अंतर्गत करेगा।