Friday, May 24, 2019
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सीमैप में दो द्विवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ

उत्तर प्रदेश के गंगा तटीय क्षेत्र में खस एवं आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण औषधीय एवं सगंध पौधों के पौध सामग्री उत्पादन एवं प्रसंस्करण विषय पर

लखनऊ apnews3-

सीएसआईआर – सीमैप में उत्तर प्रदेश के गंगा तटीय क्षेत्र में खस एवं आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण औषधीय एवं सगंध पौधों के पौध सामग्री/उत्पादन एवं प्रसंस्करण विषय पर राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड, नई दिल्ली (आयुष मंत्रालय, भारत सरकार), के द्वारा दो द्विवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरूआत हई। कार्यक्रम में गंगा तटीय क्षेत्र के जनपदों से 29 किसानों तथा 12 वन विभाग के अधिकारियों ने भाग लिया।
डा. आलोक कालरा कार्यकारी निदेशक ने अपने स्वागत भाषण में उम्मीद जताई कि इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के द्वारा किसानों को आर्थिक लाभ देने वाली औंस फसलों की जानकारी विस्तृत रूप से मिल सकेगी। उन्होनें कृषकों तथा वन अधिकारियों को आश्वस्त किया कि इस कार्यक्रम में सीमैप द्वारा पूरा सहयोग दिया जायेगा। उन्होंने यह भी बताया कि खस न केवल आर्थिक लाभ देने वाली फसल है बल्कि इससे पर्यावरण को भी काफी फायदा हो सकता है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पवन कुमार (आई.एफ.एस.) प्रमुख वन संरक्षक उत्तर प्रदेश शासन, द्वारा खस के महत्व पर विस्तार से कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को बताया। उन्होंने आशा कि खस के द्वारा किसानों के खेत जो गंगा तटीय क्षेत्र में कम उपजाऊ होते है उनसे भी लाभ मिल सकेगा। डा. आलोक कालरा ने मुख्य अतिथि को खस से बना पुष्प गुच्छ भेंट किया। इस कार्यक्रम में डा. सौदान सिंह ने नींबघास उत्पादन की उन्नत क्रियायें,, डा. वी.आर .सिंह ने सतावर के उत्पादन की उन्नत क्रियायें, डा. ए. के. गुप्ता ने भुई आंवला एवं सर्पगन्घा उत्पादन की उन्नत क्रियायें, डा. वीरेन्द्र कुमार औषधीय एवं सगंध पौधों की नर्सरी तथा उच्च गुणवत्तायुक्त बीज/रोपण सामग्री का उत्पादन एवं डा.आर. के. लाल कालमेघ एवं तुलसी के उत्पादन की उन्नत कृषि क्रियायें के बारे मं किसानों को व्याख्यान दिया। इस कार्यक्रम का संचालन डा. राजेश कुमार वर्मा के द्वारा किया गया।