Friday, May 24, 2019
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बढ़ता प्रदूषण स्कूली बच्चों को बना रहा है अस्थमा का रोगी : डॉ रवि भास्कर

-विश्व अस्थमा दिवस पर भास्कर फाउंडेशन व स्प्रिंग डेल कॉलेज एल्युमनाई एसोसिएशन ने किया अभिभावक जागरूकता व निःशुल्क चिकित्सा शिविर का आयोजन

लखनऊ Ap3news- विश्व अस्थमा दिवस के अवसर पर भास्कर फाउंडेशन व स्प्रिंग डेल कॉलेज एल्युमनाई एसोसिएशन के संयुक्त तत्वावधान में बुधवार को इंदिरानगर स्थित स्प्रिंग डेल कॉलेज के प्रांगण में अभिभावक जागरूकता व निःशुल्क चिकित्सा शिविर आयोजन किया गया। इस मौके शिविर में 200 अभिभावकों ने ब्लडप्रेशर, श्वांस, शुगर, हीमोग्लोबिन आदि की निःशुल्क जांच कराई। 

कार्यक्रम में सीनियर चेस्ट फिजिशियन डॉ रवि भास्कर ने कहा कि बढ़ता प्रदूषण तेजी से बच्चों को अपनी गिरफ्त में ले रहा है। यही कारण है कि आज स्कूल जाने वाले करीब 20 फ़ीसदी बच्चे प्रदूषण की वजह से अस्थमा की चपेट में आ रहे हैं।
उन्होंने बताया कि सांस लेने में परेशानी होना, दम घुटना, सांस लेते समय आवाज होना, छाती में कुछ जमा हुआ या भरा हुआ महसूस होना, परिश्रम का काम करते समय सांस फूलना आदि लक्षण अस्थमा के होते हैं। कुछ लोगों को सेंट, परफ्यूम, खुशबूदार तेल, पाउडर आदि से भी एलर्जी रहती है।
इनकी सुगंध नाक में जाते ही कुछ लोगों को खासी या सांस में परेशानी शुरू हो जाती है। सर्दी का मौसम अस्थमा रोगियों के लिए खासकर तकलीफ दायक होता है। इसका कारण यह है कि सर्दी में नाइट्रोजन डाइऑक्साइड गैस सल्फर डाइऑक्साइड एवं ओजोन गैस की मात्रा प्रदूषण में बढ़ जाती है।
डॉ भास्कर ने बताया कि अस्थमा को काबू में करने के लिए उसके कारणों के विपरीत आचरण करना चाहिए। धूम्रपान ना करें, कोई कर रहा हो तो उनसे दूर रहें, ठंड से एवं ठंडे पेय से बचें। सांस फूलने वाले काम न करे। 
उन्होंने बताया कि अस्थमा रोगी को ऐसी दवाइयां दी जाती हैं जो स्वसन क्रिया को आसान बनाती हैं। इनहेलर का प्रयोग आजकल अस्थमा रोग में किया जाता है, यह स्वसन तंत्र की सूजन को कम करते हैं इससे रोगी को तुरंत आराम मिलता है और कोई साइड इफेक्ट भी नहीं होता है।
रोगी आसानी से सांस ले पाता है। डॉ भास्कर ने दमा के अतिरिक्त छाती एवं श्वास संबधी विभिन्न बीमारियों के साथ-साथ लोगो को मधुमेह, हाईपरटेन्शन, थायराइड प्रबन्धन हेतु निःशुल्क परामर्श प्रदान किया।
वही डॉ पुनीत गुप्ता ने पेट रोगियों को परामर्श प्रदान किया। पल्मोनरी फंक्शन टेस्ट स्पाइरोमेट्री, मधुमेह के लिए ब्लड शुगर, एवं हीमोग्लोबिन की जॉच शिविर में की गई।
विभिन्न छाती रोगों से ग्रसित लोगों को दमा के रोग को नियंत्रित करने एवं जीवन की गुणवत्ता को सुधारने हेतु निःशुल्क शिक्षण सामग्री भी वितरित की गई। इस मौके पर प्राधानाचार्या रीता खन्ना समेत शिक्षक-शिक्षिकाएं व अभिभावक मौजूद रहे।