Wednesday, April 14, 2021
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गंगा सप्तमी के अवसर पर परमार्थ गंगा तट पर चलाया स्वच्छता अभियान

-शिव महापुराण ज्ञानयज्ञ कथा का समापन

-देशी विदेशी साधकों ने गंगा में लगायी डुबकी

ऋषिकेश Ap3news- परमार्थ निकेतन आश्रम में गंगा सप्तमी के पावन अवसर पर आध्यात्मिक और पर्यावरणीय गतिविधियों का आयोजन किया गया। परमार्थ गुरूकुल के ऋषिकुमारों ने गंगा स्नान से पहले गंगा तटों को स्नान कराया तत्पश्चात सभी ने माँ गंगा की पूजा अर्चना एवं अभिषेक किया।
परमार्थ गंगा तट पर सात दिनों से बह रही शिव महापुराण ज्ञानयज्ञ का आज समापन हुआ। श्रद्धालु शिव महापुराण की महिमा श्री चन्द्रकान्त सुर्यप्रसाद शुक्ला जी के मुखारविन्द से श्रवण कर रहे थे।

सात दिनों से बह रही शिव पुराण की ज्ञानधारा के समापन अवसर पर स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि यदि पृथ्वी को शिव बनाये रखना है तो हमें प्रदूषण को रोकना होगा। उन्होने कहा कि पृथ्वी को शव बनने से रोके। पृथ्वी को शिव बनाये शव नहीं। उसे शव बनने से रोकने के लिये हमें शिवत्व के पथ पर आगे बढ़ना होगा और वह पथ शुरू होगा सफाई और सच्चाई से। आईये हम आज के इस दिव्य अवसर पर हम सफाई और सच्चाई से जीने का संकल्प ले। परमार्थ निकेतन में बहने वाली ज्ञानगंगा आज हमारे जीवन में उतरे यही तो जीवन की सार्थकता है; यही तो शवत्व से शिवत्व की ओर जाने की यात्रा है; यही तो अन्धकार से प्रकाश की ओर जाने की यात्रा है और यही तो मृत्यु से अमरता की ओर ले जाने वाले संदेश है।


परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने गंगा सप्तमी के महत्व की महिमा बताते हुये कहा कि वैशाख शुक्ल सप्तमी के दिन भगवान ब्रह्म जी के कमण्डल से माँ गंगा की उत्पत्ति हुई थी। आज के दिन ब्रह्म जी के कमण्डल से शिव की जटाओं में उतरी थी गंगा। इसी तिथि को भगीरथ जी के तप से प्रसन्न होकर माँ गंगा भगवान शिव की जटाओं में समाहित हो गयी थी। गंगा पृथ्वी पर पृथ्वी वासियांे का उद्धार करने आयी थी, उनकी सुख समृद्धि के लिये गंगा का प्राकट्य हुआ था आज उसी गंगा माँ को जीवित रहने के लिये संघर्ष करना पड़ रहा है। वास्तव में हम अपनी नदियों, प्राकृतिक संसाधनों से प्रेम करते है; अपनी आने वाली पीढ़ियों से प्रेम करते है तो एक सच्चे नागरिक की तरह अपने जिम्मेदारी और कर्तव्यों का पूरी निष्ठा के साथ निर्वहन करना चाहते है तो हम सभी को अपनी सोच बदलनी होगी।
संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक जल संक्रामक बीमारियों से प्रतिदिन 4000 बच्चों की मौत हो जाती है। स्वामी जी ने कहा कि प्लास्टिक का बढ़ता प्रयोग प्राकृतिक संसाधनों और मानव दोनों के लिये हानिकारक है। नदियों, महासागरों, मृदा, वायु, झीलों और वातावरण में 5 एमएम से कम आकार के सूक्ष्म प्लास्टिक के कण पाये जाते है जो मनुष्य की आंत, लसीका तंत्र में प्रवेश कर खुन से गुर्दे या जिगर तक जा सकता है इससे कैंसर जैसे रोगोेें के बढ़ने की सम्भावना अत्यधिक होती है। उन्होने कहा कि अब हमारा हर कदम पर्यावरण हितैषी होना चाहिये। अनेक प्रयासों के बावजूद हम गंगा को उसका वास्तविक स्वरूप प्रदान नहीं कर पा रहे है इस हेतु जहां एक ओर सरकारी प्रयास हो रहे है वहीं दूसरी ओर जन जागरूकता भी बहुत जरूरी है। गंगा के प्रति हमारी आस्था और विश्वास श्रद्धा का विषय है परन्तु उसके प्रति हमारा कर्तव्य और सकारात्मक प्रयास गंगा को गंगोत्री से लेकर गंगासागर तक अविरल और निर्मल बना सकता है।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि आईये गंगा में डुबकी लगाने के साथ संकल्प ले की आज से कोई भी पूजन सामग्री गंगा में प्रवाहित नहीं करेंगे, साबुन का प्रयोग गंगा में नहीं करेंगे तथा अपने दैनिक क्रियाकलापों में प्लास्टिक का प्रयोग कभी भी नहीं करेंगे।
परमार्थ गंगा तट पर माँ गंगा का पूजन, पर्यावरण शुद्धि हेतु हवन तथा गंगा लहरी का पाठ किया गया। स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज और परमार्थ गुरूकुल के ऋषिकुमारोें ने माँ गंगा के प्राकट्य दिवस के पावन अवसर पर रूद्राक्ष के पौधे का रोपण किया।
शिव महापुराण ज्ञानयज्ञ में कच्छ, गुजरात सहित भारत के विभिन्न प्रांतों से आये सैकड़ों श्रद्धालुओं ने सहभाग किया और सभी ने स्वामी जी द्वारा कराये संकल्प को हाथ उठाकर दोहराया।
कथा व्यास श्री चन्द्रकान्त सुर्यप्रसाद शुक्ला जी ने स्वामी जी महाराज से प्रेरित होकर कहा कि अब हम भी हमारी सभी कथाओेे में भक्तों को संकल्प करायेंगे ताकि लोग पर्यावरण प्रेमी बने और पर्यावरण की रक्षा करे।