Monday, June 24, 2019
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महावारी शर्म नहीं शान है नारी की पहचान है – स्वामी चिदानन्द सरस्वती

विश्व महावारी दिवस पर श्री राम कथा के मंच से मासिक धर्म स्वच्छता का दिया संदेश
अपने हथेली पर लाल का निशान लगाकर फोटो शेयर कर मासिक धर्म के प्रति फैलायी जा रही है जागरूकता
ऋषिकेशAp3news- विश्व महावारी दिवस पर परमार्थ निकेतन गंगा तट आयोजित मानस कथा में परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज और जीवा की अन्तर्राष्ट्रीय महासचिव साध्वी भगवती सरस्वती जी ने मासिक धर्म स्वच्छता का संदेश दिया।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि ’’आज विश्व महावारी दिवस पर स्वामी जी महाराज ने कहा कि ’’ये शर्म नहीं शान है नारी की पहचान है, यदि नारी स्वस्थ, माँ स्वस्थ तो देश स्वस्थ और स्वच्छता से सीधा-सीधा सम्बंध है मासिक धर्म का। यदि देश की मातायें और बेटियाँ स्वस्थ रहेगी तो बच्चे स्वस्थ रहेंगे; बच्चे स्वस्थ होगे तो देश स्वस्थ होगा क्योकि बीमार देश कभी प्रगति नही कर सकता है इसलिये इसके महत्व को समझे और स्वच्छ एवं स्वस्थ रहने का संकल्प करें।
जीवा की अन्तर्राष्ट्रीय महासचिव साध्वी भगवती सरस्वती जी ने कहा कि समाज में फैली मासिक धर्म सम्बन्धी गलत अवधारणा को दूर करने और महिलाओं और किशोरियों को महावारी प्रबंधन सम्बन्धी सही जानकारी देना ही इसका उद्देश्य है। आंकड़े के अनुसार आज भी 50 प्रतिशत से ज्यादा किशोरियां मासिक धर्म के कारण स्कूल नहीं जाती हैं, महिलाओं को आज भी इस मुद्दे पर बात करने में झिझक होती है जबकि आधे से ज्यादा को तो ये लगता है कि मासिक धर्म कोई अपराध है।अब हमें अपनी चुप्पी तोड़नी होगी।
इस अवसर पर यूनिसेफ के द्वारा रेड डाॅट कैंपेन में भी लोगों बढ़ चढ़ के हिस्सा लिया। इस कैंपेन में अपनी हथेली पर लाल निशाल लगाकर अपनी फोटो सोशल मीडिया पर शेयर करना होता है। मासिक धर्म स्वच्छता और जागरूकता से तात्पर्य केवल महिलाओं और लड़कियों को सेनेटरी पैड का उपयोग करना और स्कूल बीच में न छोड़ने के प्रति जागरूक करने के अलावा साथ सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उपयोग के पश्चात सैनेटरी पैड का किस प्रकार निस्तारण करे। अक्सर देखा गया है कि उपयोग के पश्चात खुला ही सैनेटरी पैड कूडा दान में डाल दिया जाता है। पुणे की एक रिपोर्ट के अनुसार स्वच्छता कार्यकर्ता पाॅच लाख से अधिक घरों से 6.5 लाख किलोग्राम कचरा इकट्ठा करते है जिसमें से 3 फीसदी सैनेटरी कचरा होता है, जिसका मतलब है कि वे हर दिन करीब 20 हजार किलोग्राम गंदे डायपर और सेनेटरी पैड सम्भालते है। ऐसे में सैनेटरी कचरा अलग करने में प्रतिदिन मक्खियों, कीड़ों और असहनीय गंध का सामना करना पड़ता है। इससे उन श्रमिकों को सिरदर्द, चक्कर, बुखार और अन्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है अतः सैनेटरी पैड और डाइपर का इस्तेमाल तो करे परन्तु उसके निस्तारण पर विशेष ध्यान दें। परमार्थ निकेतन द्वारा कथा में आयी सभी महिलाओं को बे्रसलेट वितरित किये गये। इस अवसर पर उपस्थित सभी महिलाओं और बेटियों को स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने महामारी के समय स्वस्थ, जागरूक और इस कारण अपनी शिक्षा बीच में न छोड़ने का संकल्प कराया, कथा में उपस्थित हजारों श्रद्धालुओं ने हाथ उठाकर संकल्प किया।