Wednesday, April 14, 2021
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श्रीराम कथा में शिव-सती प्रसंग का सुंदर वर्णन

लखनऊ Ap3news-विश्व मंगल परिवार द्वारा जानकीपुरम विस्तार निकट सीडीआरआई में आयोजित श्री राम कथा के तृतीय दिवस बुधवार को देवी महेश्वरी (श्रीजी) ने सती प्रसंग शिव पार्वती के विवाह का प्रसंग का विस्तार से वर्णन करते हुए बताया कि एक दिन सती जी को भगवान शिव अपने आराध्य श्री राम जी की कथा सुना रहे थे तभी आकाश मार्ग से विमानों को जाते देख सती जी के पूछने पर शिव जी ने सम्पूर्ण व्रतांत बतलाया यह सुनकर सती जी अपने पिता के घर जाने के लिए उद्विग्न होती है और शंकर जी के मना करने पर भी सती जी जब पिता की यज्ञ में पहुच जाती हैं और मानस में लिखा है कतहुँ न दीख संभु कर भागा ।

यह देख कर सती जी को क्रोध आ जाता है और अपने पिता की यज्ञ में आत्म दाह कर लेती है बीरभद्र के द्वारा दक्ष को दंड दिया जाता है देवताओं के मानने पर बकरे का सिर दक्ष के भगवान शिव लगा देते हैं। उसके पश्चात शिव जी समाधि में चले जाते हैं सती जी पार्वती के रूप में हिमालय के घर में जन्म लेती हैं । और बड़ी होकर तप के लिए निकल लेती हैं । इधर शिव जी को समाधि से जगाने आये कामदेव को शिव जी ने अपनी तीसरी आंख से भस्म कर देते हैं देवगण संकर जी को मनाते हैं तब शिव जी बारात की तैयारी करके बूढ़े बैल पर सवार होकर विवाह के लिए जाते हैं बारात को देख कर पार्वती जी की माँ डर जाती हैं नारद जी के समझाने पर वो बारात का स्वागत करती है विधिवत विवाह संपन्न हुआ ।जिसका सजीव झांकियो के माध्यम चित्रण किया गया जिसे देख कर भक्त गण झूम उठे
कथा के तृतीय दिवस में आर डी सक्सेना धर्म पत्नी श्रीमती प्रतिमा सक्सेना मुख्य यजमान रहे एवं समिति के अध्यक्ष उत्तम मिश्र , उमेश गुप्ता , राम कुमार लोधी ,सुरेश प्रसाद शाह , डॉ राम प्रकाश गुप्ता , अरविंद शुक्ला, राजीव शुक्ला , अवनीश शुक्ला, अनुभव गुप्ता इत्यादि हमारे सहयोगी परिवार सखी मंड़ल व भारी संख्या में भक्त गण मौजूद रहे