Saturday, August 24, 2019
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सिड्बी द्वारा प्रायोजित केन्द्रीय औषधीय एवं सगंध पौधा संस्थान (सीमैप) में औषधीय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम

लखनऊ Ap3news- केन्द्रीय औषधीय एवं सगंध पौधा संस्थान (सीमैप), लखनऊ द्वारा आयोजित एवं सिड्बी द्वारा प्रायोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. पी. वी. अजय कुमार कार्यकारी निदेशक, सीमैप द्वारा किया गया ।

औषधीय एवं सगंध पौधों की उन्नत कृषि प्रौद्योगिकियों तथा उनके प्राथमिक प्रसंस्करण विषय पर आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में देश के 12 राज्यों के 44 जिलों के 63 प्रतिभागियों ने भाग लिया । तीन दिन चलने वाले इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में दूर-दराज से आने वाले प्रतिभागियों का कार्यकारी निदेशक, सीमैप ने स्वागत किया और अपने स्वागत भाषण में कहा कि औषधीय एवं सगंध पौधों की विश्व स्तरीय मांग को देखते हुए इनकी खेती करना आवश्यक हो गया है । घटते जल स्तर तथा जानवरों से होने वाले नुकसान की समस्या के कारण भी औषधीय एवं सगंध पौधों की खेती की मांग बढ़ी है । परंपरागत फसलों की खेती से उचित लाभ न मिलने कारण भी किसान कुछ नई खेती करने की तरफ बढ़ रहा है । इस संस्थान के वैज्ञानिकों के अथक प्रयासों द्वारा किसानों के लिये औषधीय एवं सगंध पौधों की उन्नत प्रजातियाँ विकसित की गयी हैं जिनसे किसानों को अधिक पैदावार से अधिक लाभ मिलेगा । उन्होने आगे कहा कि अगले दो दिन चलने वाले इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में सीमैप के वैज्ञानिक आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण औषधीय एवं सगंध पौधों की खेती पर विस्तार से चर्चा करेंगे तथा साथ ही प्रसंस्करण एवं भंडारण की तकनीकियों पर भी चर्चा करेंगे जिससे किसानों के उत्पादन को राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय स्तर की गुणवत्ता को बनाया जा सके और उसका अधिक तथा उचित मूल्य किसानों को मिल सकें ।

आज के तकनीकी सत्र मे डॉ. संजय कुमार ने संस्थान की गतिविधियों तथा सेवाओं के बारें में प्रतिभागियों को अवगत कराया । प्रतिभागियों को औषधीय एवं सगंध पौधों की पहचान के लिए सीमैप के प्रदर्शन ब्लॉक का श्री दीपक कुमार वर्मा द्वारा भ्रमण कराया गया । तत्पश्चात डॉ. सौदान सिंह ने मेंथाल मिंट के उत्पादन की उन्नत कृषि तकनीकी एवं आर्थिक महत्व पर प्रकाश डाला । नीबूघास के उत्पादन की उन्नत कृषि क्रियाओं पर डॉ. संजय कुमार ने किसानों से विस्तार से चर्चा की । इसके पश्चात डॉ. राजेश कुमार ने खस के उत्पादन की उन्नत कृषि तकनीकियों के बारे में प्रतिभागियों विस्तार से चर्चा की । डॉ. संजय कुमार द्वारा रोशाघास की उत्पादन तकनीकी पर विस्तार से चर्चा की । कार्यक्रम के अंतिम सत्र में डॉ. आर. के. श्रीवास्तव ने जावघास के उत्पादन की उन्नत कृषि क्रियाओं पर चर्चा की तथा डॉ. आर. के. लाल ने कैमोमिल के उत्पादन तकनीकी पर प्रतिभागियों को विस्तार से जानकारी दी ।

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