Tuesday, October 15, 2019
Home > Top Stories > बढ़ते प्रदूषण के कारण यमुना और ताजमहल दोनों पर संकट-स्वामी चिदानन्द सरस्वती

बढ़ते प्रदूषण के कारण यमुना और ताजमहल दोनों पर संकट-स्वामी चिदानन्द सरस्वती

-स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज और राज्यपाल उत्तराखण्ड बेबी रानी मौर्य के सान्निध्य में आज हुई यमुना जी की दिव्य आरती
ऋषिकेश Ap3news- परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज एवं राज्यपाल उत्तराखण्ड बेबी रानी मौर्य के पावन सान्निध्य में आज आगरा, ताजमहल के पास दशहरा मैदान में माँ यमुना जी की दिव्य और भव्य आरती का शुभारम्भ हुआ।
आगरा में माँ यमुना जी की स्थिति देखकर चिंतित होते हुये स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि नदियां तो देश की समृृद्धि का प्रतीक होती है और मन को शान्ति, शीतलता प्रदान करती है। बढ़ते प्रदूषण और गिरते गंदे नालों के कारण आज ये जीवनदायिनी नदियां रोगादायिनी बनती जा रही है। उन्होने कहा कि नदियों को जीवंत और अविरल बनायें रखने के लिये आस्था के साथ जागरूकता का होना नितांत आवश्यक है।
 स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज ने नदियों को जीवंत बनायें रखने के लिये एक नवोदित प्रयोग किया उन्होने देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी नदियों के तटों पर आरती का क्रम आरम्भ कर वहां से नदियों, पर्यावरण संरक्षण, ग्लोबल वार्मिग, जलवायु परिवर्तन जैसे वैश्विक विषयों का संदेश प्रसारित करने का क्रम आरम्भ किया। उन्होने सन 1997 में परमार्थ गंगा तट पर आरती का शुभारम्भ किया आज वह आरती विश्व विख्यात हो चुकी है। साथ ही समय-समय पर गंगा आरती में विश्व स्तर के वैज्ञानिक, संत, पर्यावरणविद्, जल राजदूत, अनेक देशों के राष्ट्रपति, राज्यपाल, राजदूत, फिल्मी हस्तियां, संगीतज्ञ और अनक क्षेत्रों में कार्य करने वाले शिखरस्थ विभूतियां सहभाग करती है जिन्हें इस मंच से पर्यावरण के लिये कार्य करने का संकल्प कराया जाता है और उनके द्वारा भी आम लोगों को जागरूकता का संदेश प्रसारित किया जाता है इस प्रकार गंगा आरती आस्था के साथ जागरूकता की संदेश वाहक बन गयी है।
 स्वामी जी ने 1997 मंे परमार्थ गंगा तट पर आरती का क्रम आरम्भ किया तत्पश्चात 1998 में गंगोत्री, सन 1999 में वाराणसी जिसे अतुल्य भारत में स्थान प्राप्त है और आज वाराणसी ही नहीं पूरे भारत की शान है। वर्ष 2000 में प्रयागराज में संगम आरती का क्रम आरम्भ किया। साथ ही रूद्रप्रयाग, उत्तरकाशी सहित भारत में नदियों के तटों पर बसे अनेक शहरों में आरती का क्रम आरम्भ किया। उन्होने अमेरिका, यूरोप के अनेक देशों में, जमर्नी, माॅरीशस और विश्व के अन्य देशों में भी स्वामी जी के पावन सान्निध्य में नदियों के तट पर आरती की गयी जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभाग किया और दिव्य संदेश को आत्मसात किया। स्वामी जी का विचार है कि आरती के माध्यम से जन जागरण होगा जिससे घटते जल की जो समस्यायें उत्पन्न हो रही है उसे काफी हद तक कम कर सकते है।
 माँ यमुना की स्थिति के विषय में चर्चा करते हुये स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि यमनोत्री से लेकर प्रयागराज तक यमुना जी उत्तराखण्ड, राजस्थान, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली, मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश से होकर गुजरती है परन्तु अपनी इस यात्रा में दिल्ली के 22 किलोमीटर में वह सबसे अधिक प्रदूषित होती है। उन 22 किलोमीटर में 18 गंदे नाले और उसमें से वजीराबाद बांध और ओखला बांध के बीच 15 नाले यमुना में गिरते है जिससे यमुना के जल में अमोनिया की मात्रा 1.12 पार्टिकल्स पर मिलियन पहुंच गयी है जो स्वास्थ्य के लिये अत्यंत हानिकारक है। अगर हम दिल्ली की ही बात करे तो लगभग 3269 मिलियन गैलन गंदा पानी, औद्योगिक कचरा, पेपर मिल, चीनी मिल, गन्ना पेरन का कचरा सीधे तौर पर यमुना में डाला जा रहा है जिससे दिल्ली से अगरा जाते-जाते यमुना लगभग मृतप्राय हो गयी है। स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि यमुना को जीवंत बनाना है तो जन जागरूकता नितांत आवश्यक है। 
 राज्यपाल उत्तराखण्ड, महामहिम श्रीमती बेबी रानी मौर्य जी ने कहा कि मैं पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज से बार-बार यही आग्रह करूंगी कि आप महीने दो महीनों में आगरा अवश्य पधारे ताकि आगरा स्वच्छ, सुन्दर बनें तथा ताजमहल से भी अधिक पूरी दुनिया में इसकी पहचान बनें। उन्होने आरती में पधारे सभी श्रद्धालुओं और आगरा के भाई-बहनों को प्रेम, स्नेह और प्रणाम किया।
 स्वामी जी महाराज ने आज की यमुना जी की आरती के आयोजकों से आह्वान किया कि यमुना जी की आरती का क्रम निरन्तर बनायें रखे जिससे ताजमहल का दीदार करने आने वाले हजारों लोगों को भी नदियों की निर्मलता और अविरलता का संदेश मिलेगा तथा इससे यमुना जी को भी जीवंत बनाया जा सकता है। स्वामी जी ने कहा कि हमारी महामहिम श्रीमती बेबी रानी मौर्य जी यमुना और आगरा को लेकर काफी चिंतित और सजग भी है। उनका प्रयास है कि देश की नदियां अविरल और निर्मल हो।
  स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज और महामहिम श्रीमती बेबी रानी मौर्य जी ने यमुना जी की आरती के आयोजकों को पर्यावरण का प्रतीक रूद्राक्ष का पौधा भेंट कर सभी का अभिनन्दन किया। स्वामी जी महाराज ने आरती में हजारों की संख्या में आये श्रद्धालुओं को एकल उपयोग प्लास्टिक का प्रयोग न करने का संकल्प कराया सभी ने हाथ खड़े कर संकल्प किया।
error: Content is protected !!