Wednesday, September 18, 2019
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प्रदेश को मिली पहली 16 मॉड्यूल सीबी नैट मशीन

लखनऊ Ap3news- किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह ने 16 मॉड्यूल सीबी नैट मशीन का लोकार्पण किया। यह मशीन किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के माइक्रोबायलॉजी विभाग में स्थापित की गई है। इस मशीन की विशेषता यह है कि इसमें एक साथ 16 मरीजों के बलगम की जांच करके उसमें टी बी का पता लगाया जा सकता है। इसके साथ ही मात्र 2 घंटे के अंदर इस मशीन द्वारा यह भी पता चल जाता है कि टीवी का रोगी एमडीआर टीबी से ग्रसित है अथवा नहीं, उसमें रिफैंपम्सिन नामक दवा रजिस्टेंट है या नहीं।

इस मशीन के मिल जाने से केजीएमसी अब पहले से 4 गुना अधिक मरीजों की जांच करने में सक्षम होगा। इस अवसर पर समारोह को संबोधित करते हुए केजीएमयू के प्रोफेसर सूर्यकांत ने बताया कि हमारे देश में हर डेढ़ मिनट में एक टीवी रोगी की मृत्यु हो जाती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टी बी की बीमारी का समूल नाश करने करने के लिए टी बी का नोटिफिकेशन जरूरी कर दिया है। इससे यह लाभ हुआ है कि 2018 में 4 लाख से ज्यादा मरीजों का नोटिफिकेशन किया गया और इस प्रकार जिन रोगियों का पता पहले नहीं चल पाता था उनका भी पता चल जाता है।

उन्होंने कहा कि टीवी के रोगियों को पोषण भत्ते के रूप में दिए जाने वाले निक्षय पोषण योजना के अंतर्गत अब तक 74 करोड़ रुपए से ज्यादा का स्थानांतरण सीधे रोगियों के बैंक खाते में किया जा चुका है। इस अवसर पर इस मशीन को केजीएमयू को दान करने वाली संस्था यूनियन के प्रोजेक्ट डायरेक्टर डॉ सैयद इमरान फारूक ने कहा की उत्तर प्रदेश विश्व के प्रत्येक पांच में एक टीबी रोगी का घर है। लेकिन मशीन मरीजों को खोज नहीं सकती। केवल मरीजों की जांच कर सकती है। मरीजों को खोजने का कार्य स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को ही करना पड़ेगा। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में प्रतिवर्ष 1लाख रोगियों की मृत्यु टी बी के कारण होती है। उन्होंने मंत्री से अपील की कि केजीएमयू को उत्तर प्रदेश में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाया जाए, जो पूरे उत्तर भारत के लिए कार्य करें।
इस अवसर पर राज्य क्षयरोग नियंत्रण अधिकारी डा.संतोष गुप्ता ने बताया कि एम डी आर टीबी, एच आई वी संक्रमित टी बी सबसे ज्यादा भारत मेंं है।2018 में टी बी रोगियों के नोटिफिकेशन में 38% की वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि drug resistant TB एक चुनौती है।उन्होंने बताया कि इस मशीन के आ जाने से टीबी के उपचार मेंं सफलता की दर में भी वृद्धि होगी, जो अभी 78% है।उन्होंने बताया कि टी बी के मरीज के पोषण से टीबी का गहरा नाता है।
विभागाध्यक्ष माइक्रो बायलाजी डा.अमिता जैन ने बताया कि अब उ. प्र. के प्रत्येक जिले में सीबी नेट मशीन से निदान की सुविधा उपलब्ध हो गई है ।अब घर-घर जाकर टीवी के मरीज की पहचान की जा सकती है ।उन्होंने कहा कि इसका एक फायदा यह हुआ है कि अधिक मरीजों को खोजने से इसके फैलने की चेन ब्रेक करने में सफलता मिलती है, क्योंकि टी बी का प्रत्येक रोगी अगर इलाज न मिले तो वह 10 नए रोगी पैदा करता है। उन्होंने कहा कि लेकिन मॉनिटरिंग के लिए इसका प्रयोग नहीं कर सकते हैं। यदि इस बलगम में ब्लड मिक्स हो जाएगा तो भी इसकी डायग्नोसिस नहीं की जा सकती। इसलिए इस बलगम में ब्लड की मिलावट नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि 100 में से 80 मरीजों की पहचान की जा सकती है और यह मशीन यह भी बता सकती है कि मरीज पर रिफैम्पिसिन का प्रभाव होगा अथवा नहीं।
किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के कुलपति डा एम एल भट्ट ने बताया यह पूरे प्रदेश में पहली मशीन है। जिससे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 2025 तक टी बी खत्म करने के लक्ष्य की प्राप्ति में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि टीवी के रोगियों में कमी लाने में स्वच्छता मिशन का बहुत योगदान है। इसी प्रकार उज्जवला योजना, आयुष्मान योजना, फिट इंडिया तथा अंतरराष्ट्रीय योग दिवस जिसकी घोषणा प्रधानमंत्री ने की है वह टी बी की बीमारी को कम करने में महत्वपूर्ण योगदान करेंगे ।उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्य की बात है कि पूरे विश्व की 27% मरीज भारत में है और इसमें आठ लाख उत्तर प्रदेश में है। उन्होंने मंत्री और स्वयंसेवी संस्थाओं से अपील की कि केजीएमसी को और मशीन उपलब्ध कराई जाए ।हमारे पास मानव संसाधन उपलब्ध है। और मशीनें आने से हम और भी ज्यादा रोगियों की पहचान कर सकेंगे ।टीवी एक चैलेंज है राज रोग है। 1882 में इस बीमारी की खोज हुई लेकिन पहली दवा 1950 में बनी। उन्होंने कहा कि मल्टीड्रग रेजिस्टेंट टीबी रोगियों को अत्यंत महंगी दवा बेडाकुलीन निशुल्क उपलब्ध कराई जाती है। उन्होंने कहा कि नई टेक्नोलॉजी की आवश्यकता है जिससे फाल्स नेगेटिव नहीं होने चाहिए ।
इस अवसर पर माननीय मंत्री चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण जय प्रताप सिंह जी ने जीन एक्सपर्ट मशीन का लोकार्पण करते हुए यूनियन के प्रोजेक्ट डायरेक्टर सैयद इमरान फारुख का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि हमारे देश में जनसंख्या एक समस्या है जो बढ़ती जा रही है। लाइफस्टाइल में बदलाव लाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि पूर्वांचल में बीमारी की हालत ज्यादा खराब है ।उन्होंने एक मरीज के बारे में बताया जिस को mdr-tb थी और उस को बचाया नहीं जा सका। उन्होंने कहा कि यह भी देखने की जरूरत है कि मरीज को जो दवा दी जा रही है वह उसे खा रहा है अथवा नहीं ।क्योंकि कुछ मरीज इतने गरीब है कि वह अपनी दवा को खाने की जगह बेच देते हैं ।उन्होंने कहा कि बीमारियों से बचाव के लिए लाइफ स्टाइल बदलने की जरूरत है। कैसे हम अपनी रोग प्रतिरक्षण क्षमता को बढ़ाएं, यह जानना जरूरी है ।युवा लोगों से उन्होंने आह्वान किया कि वह अपनी फिटनेस पर ध्यान दें और माननीय प्रधानमंत्री के आह्वान पर योग करना शुरू करें ।टी बी एक भयानक बीमारी है जिसके लिए सम्मिलित प्रयास करने की आवश्यकता है ।हम इसमें पूरा सहयोग करेंगे लेकिन जन भागीदारी जरूरी है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर नरेन्द्र अग्रवाल ने धन्यवाद देते हुए बताया कि महामहिम राज्यपाल महोदया ने टीवी की बीमारी के समूल नाश के लिए प्रयास करने का आह्वान किया है और इस कड़ी में उन्होंने टीवी से ग्रस्त बच्चों को गोद लेने का आव्हान किया था उन्होंने कहा कि यह प्रसन्नता की बात है कि लखनऊ में हमने 18 वर्ष से कम उम्र के 548 टी वी ग्रसित बच्चों का पता लगाया था जिनमें सभी को गोद ले लिया गया है। गोद लिए गए बच्चों की पहचान गुप्त रखी जाएगी। उन्होंने कहा कि गोद लिए बच्चों के घर माह में एक बार विजिट करना जरूरी होगा और जिस ने गोद लिया है वह पीड़ित बच्चे के घर जाकर उन्हें पोषण हेतु कुछ गिफ्ट भी देंगे जो कि मूंगफली, ड्राई फ्रूट्स इत्यादि कुछ भी हो सकते हैं। उन्होंने आशा प्रकट की कि सब के सहयोग से हम इस बीमारी को 2025 तक अवश्य ही दूर करने में समर्थ होंगे।

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