Tuesday, October 15, 2019
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गुडम्बा में पाइप गोदाम और आरओ रिपेयरिंग सेंटर में लगी आग

-फायर ब्रिगेट की सात गाड़ियों ने तीन घंटे की मशक्कत के बाद पाया काबू

-बेसमेंट में स्थित गोदाम में आग से बचाव के नहीं थे पुख्ता इंतजाम

-गोदाम के ऊपर प्रथम तल पर सोए थे 20 से अधिक मजदूर

लखनऊ Ap3news- गुडम्बा थाना क्षेत्र के कुर्सी रोड स्थित एक पाइप गोदाम और आरओ रिपेयरिंग सेंटर में शुक्रवार आधी रात को संदिग्ध हालात में आग लग गई। गोदाम में सो रहे मजदूरों ने किसी तरह से भाग कर खुद की जान बचाई। सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस ने नौ फायर ब्रिगेट की गाड़ियों की मदद से करीब पांच घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। पुलिस की प्रारंभिक जांच में शॉर्ट-सर्किट से आग लगने की वजह सामने आ रही है। हालांकि गोदाम मालिक ने मजदूरों पर जलती हुई बीड़ी फेंकने की भी आशंका जताई है।

 इंस्पेक्टर गुडम्बा रीतेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि अतरौली निवासी प्रेम शंकर द्विवेदी का कुर्सी रोड स्थित श्रष्टि अपार्टमेंट के सामने करीब ढाई हजार वर्ग फुट में गोदाम व दुकानें हैं। जिसके बेसमेंट के हिस्से को जल निगम के ठेकेदार आशियाना निवासी शुभम त्रिवेदी ने 22 जून से किराए पर ले रखा है। जिसमे काफी मात्रा में प्लास्टिक के पाइप आदि समान स्टोर था। वहीं प्रथम तल पर फूलबाग कॉलोनी गुडम्बा निवासी टिंकू यादव ने किराए पर लेकर आरओ रिपेयरिंग सेंटर बना रखा था। इसके अलावा प्रथम तल के एक हिस्से में ठेकेदार शुभम त्रिवेदी के करीब 20 लेबर रोजाना रुकते हैं। मजदूरों के मुताबिक शुक्रवार रात करीब 12:30 बजे अचानक धुआ भरने से वह लोग जग गए तो देखा कि बेसमेंट में रखी प्लास्टिक की पाइपों में आग लगी थी। जिसकी सूचना मजदूरों ने कॉल कर शुभम को दी। इंस्पेक्टर के मुताबिक जब तक फायर ब्रिगेट मौके पर पहुंच कर प्रयास शुरू करती उससे पहले ही आग ने आरओ सेंटर को भी चपेट में ले लिया। इतना ही नहीं पड़ोस के कॉम्प्लेक्स में बनी फैब्रिकेटर्स समेत तीन अन्य दुकानें भी चपेट में आ गई। इंस्पेक्टर के मुताबिक पाइप गोदाम और आरओ सेंटर पूरी तरह से जलकर राख हो गया।

मानकों की अनदेखी कर दो शराब के ठेकों को दिया गया लाइसेंस

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक कॉम्पेक्स के बाहरी हिस्से में देसी और अंग्रेजी शराब की दो दूकानों को मानकों की अनदेखी कर लाइसेंस दिया गया है। स्थानीय लोगों के मुताबिक बेसमेंट और प्रथम तल को काफी समय से गोदाम के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। जिसमे फायर ब्रिगेड से कोई एनओसी भी नहीं थी। ऐसे में शराब की दुकानों का लाइसेंस देना खतरे से खाली नहीं था। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना था कि यह तो गनीमत रही कि फायर ब्रिगेड समय से पहुंच कर प्रयास शुरू कर दिया। नहीं तो दोनों शराब की दुकानें आग की चपेट में आने के बाद स्थित और भी भयावह हो सकती थी।

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