Monday, April 22, 2019
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कल बाला जी श्री वैंक्टेश्वर मन्दिर में खुलेंगे बैकुंठ के द्वार बंथरा में है आन्ध्र प्रदेश के तिरुपति वैंकटेशवर जैसा मंदिर

लखनऊ मधुर मोहन तिवरी – बाला जी श्री वैंक्टेश्वर मन्दिर बंथरा स्थित है। वहां साल में केवल एक ही दिन बैकुंठ द्वार खोले जाते हैं। यह दिन इस साल मंगलवार 18 दिसम्बर को पड़ रहा है। ऐसी मान्यता है कि जो बैकुंठ एकादशी को भगवान की पालकी थामकर बैकुंठ द्वार से निकलता है उसे इसी जीवन में मुक्ति मिल जाती है। बैकुंठ एकादशी को लोग मोक्षदा एकदशी भी कहते हैं। मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी पर लोग व्रत रखकर भगवान विष्णु का पूजन करते हैं। इस बार एकादशी पर सर्वार्थ सिद्धि योग होने के कारण भक्तों में खासा उत्साह दिख रहा है।

मंदिर के संस्थापक व्यवस्थापक जी.एम.विश्वनाथन एयर वाइस मार्शल पद से रिटायर हुए हैं। उनके प्रयासों से कानपुर हाईवे पर आज से 27 साल पहले बाला जी श्री वैंक्टेश्वरा टेम्पल की नींव रखी गई। लोकप्रियता को बढ़ता देख उस मंदिर को 2009 में बंथरा में वर्तमान स्थान पर आन्ध्र प्रदेश के तिरुपति वैंकटेशवर मन्दिर जैसा मंदिर विकसित किया है। वहां जाने की हर भक्त की तमन्ना होती है पर समय और धन की कमी के चलते उन्हें निराश होना पड़ता था। इसलिए उन्होंने चित्तूर जिले में स्थित तिरुमला की पहाड़ियों में बने श्री वैंकटेश्वर मंदिर की नकल लखनऊ में दर्ज करा दी है। यह भागीरथी प्रयास जी.एम.श्वनाथन ने लखनऊ पोस्टिंग के दौरान शुरू किया था। इस मंदिर के भवन में खास ट्रेडिशनल बेलबूटे, नक्काशी और यक्ष आकृतियों ही नहीं आन्ध्र प्रदेश के कलाकारों ने तैयार की है बल्कि तिरुपति वैंकटेशवर मन्दिर जैसी प्रतिमा भी स्थापित की है। आज भी आंध्र से ही मुकुट, श्रंगार के आभूषण चंदन तिलक और वस्त्र तक आते हैं। मंदिर में बाला जी की भव्य प्रतिमा की बांयी ओर पद्मावती श्रीदेवी के रूप में और दाएं ओर आण्डाल की प्रतिमा भूदेवी के रूप में विराजमान है। मंदिर में हनुमान जी की भी प्रतिमा स्थापित की गई है। उनके नजदीक ही बैंकुण्ठ द्वार है।

दो दिवसीय पर्व आज से
दो दिन चलने वाले पर्व के पहले दिन सोमवार 17 दिसम्बर को सुबह नौ बजे से पूजन आदि शुरू हो जाएगा। इसमें सबसे पहले पंच धातु, पीतल, तांबा, सोना, चांदी और लोहे से बनी उत्सव मूर्तियों का दूध, दही, शहद, जल आदि से अभिषेक किया जाएगा। उसके बाद वाहन आदि तैयार किये जाएंगे। मुख्य आयोजन मंगलवार 18 दिसम्बर को होगा। उस दिन सुबह पांच बजे से ही द्वार खुल जाएंगे। सूर्योदय से पहले ही नित्य पूजन के बाद सुबह 10 बजे विष्णु सहस्त्र नाम संकीर्तन के बाद अर्चना की जाएगी। इसके बाद ही बहु प्रतीक्षक बैंकुठ द्वार को खोलकर मंदिर परिसर में गर्भगृह की परिक्रमा की जाएगी। तीन बार इस परिक्रमा के बाद दोबारा प्रतिमाओं को मंदिर के गर्भ गृह में रख दिया जाएगा। उस दिन महा आरती दोपहर 11:30 बजे होगी। उसके बाद प्रसाद का वितरण किया जाएगा।

उस दिन खासतौर से प्रसाद के लिए सूजी का सब्जियों वाला उपमा तैयार किया जाएगा। खास बात यह है कि वहां प्रसाद मंदिर की स्वंय सेवक महिलाएं ही तैयार करती हैं। उनका नेतृत्व कर रहीं सावित्री विश्वनाथन ने बताया कि मोहल्ले की महिलाओं को बाला जी सेविकाओं के रूप में आत्म निर्भर बनाया गया है। वर्तमान में यह महिलाएं विभिन्न अनुष्ठानों के लिए केसरिया सूजी हलुआ, गुड़ चावल, दही चावल, नीबू चावल आदि भी तैयार कर लेती हैं।