Tuesday, December 10, 2019
Home > Education > इंटीग्रल यूनिवर्सिटी : कविता बनी यूनिवर्सिटी की टॉपर, दो गोल्ड मिले

इंटीग्रल यूनिवर्सिटी : कविता बनी यूनिवर्सिटी की टॉपर, दो गोल्ड मिले

– 11वॉ दीक्षांत समारोह में 61 गोल्ड, 62 सिल्वर मेडल, 54 पीएचडी समेत 2500 छात्र छात्राओं को दी गई उपाधि
 
लखनऊ Ap3news-इंटीग्रल यूनिवर्सिटी का 11वां दीक्षांत समारोह सोमवार को विश्वविद्यालय के कुर्सी रोड स्थित परिसर में आयोजित किया गया। इस समारोह में 2500 छात्र-छात्राओ को डिग्री बांटी गई। यूनिवर्सिटी टॉपर का खिताब एम.टेक.(आर.ई.टी.) की छात्रा कविता सिंह के नाम रहा। वहीं, कम्प्यूटर साइंस की छात्रा ज़रका खान को सेकंड यूनिवर्सिटी टॉपर के खिताब से नवाजा गया।

बड़ी से बड़ी उपलब्धियों व डिग्री के बाद भी सरलता न भूले

मुख्य अतिथि विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित ने कहा कि अक्सर लोग डिग्री, उपाधि व उपलब्धियाँ पाकर घमंड में आ जाते हैं। किसी से ठीक से बात भी नहीं करते हैं। ऐसी उपाधि किस काम की। उन्होंने छात्र छात्राओं से कहा कि उपलब्धियों व डिग्री के बाद भी कभी भी अपनी सरलता व सहजता न छोड़े। श्री दीक्षित ने कॉन्वोकेशन के पारम्परिक रोब्स (गाउन) पर भी अपनी चिंता जाहिर करते हुए कहा कि इस पोशाक में भारतीयता नहीं दिखाई पड़ती है। भारत की अपनी संस्कृति है, लय और छंद है। गाउन में भारतीय संस्कृति दिखानी चाहिए। मुख्य अतिथि ने विज्ञान व दर्शन पर भी अपने विचार रखे। इंटीग्रल विश्वविद्यालय के कुलाधिपति प्रो.एस.डब्लू.अख़्तर ने मुख्य अतिथि के गाउन पर दिए गए सुझाव पर अमल का भरोसा दिया। समारोह में केजीएमयू के डॉ सलिल टंडन व एकेटीयू विश्वविद्यालय के पूर्व वाइस चांसलर प्रो. एमजेड खान को मानक उपाधि प्रदान की गयी। इस मौके राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष सैयद गय्यरूल हसन रिज़वी एवं केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय, इम्फाल के कुलाधिपति प्रो. एस अय्यपन मुख्य रूप से उपस्थित थे। अन्त में कुलसचिव आईए खॉन ने सभी अतिथिगणों, अभिभावकों व छात्र-छात्राओं का धन्यवाद ज्ञापित किया। 
????????????????????????????????????
????????????????????????????????????
बॉक्स
2500 को मिली उपाधि
पीएचडी : 54
परास्नातक : 604
स्नातक : 1671
डिप्लोमा : 75
गोल्ड मेडल : 61
सिल्वर मेडल : 62
टॉपर की बात ……
शिक्षक बन करने ही समाज की सेवा
एमटेक करने के बाद अब शोध करूंगी। उसके बाद प्रोफेसर बनना है। यह कहना है यूनिवर्सिटी टॉपर कविता सिंह का। कानपुर की रहने वाली स्नेहिल के पिता सन्तोष कुमार कुरील डिबई, बुलंदशहर के राजकीय पालीटेक्निक में एचओडी हैं। जबकि उनकी मां शशि देवी ग्रहणी हैं। कविता को कविताएं भी लिखने का शौक है, कई कविताएं मैगजीन में छप भी चुकी है।
शोध है अगला लक्ष्य
कविता की तरह विश्वविद्यालय की दूसरी टॉपर ज़रका खान भी शोध करेंगी। वह कहती हैं कि यूनिवर्सिटी में सेकेंड टॉपर बनना एक सपने जैसा है। नानपारा, बहराइच निवासी पिता फरहत उल्ला खान व्यवसाई है। जबकि मां दरख्शां बेगम गृहणी हैं। शोध के बाद कनाडा में अपने पति सैय्यद शादाब हुसैन के कार्य मे सहयोग करेंगी। 
आर्गनिक खेती को देना है बढ़ावा
गोल्ड मेडल हासिल करने वाले शाहजहाँपुर निवासी मोहम्मद नोमान का अगला लक्ष्य भी शोध है। उनके पिता मोहम्मद जमील अहसन का व्यवसाय हैं और मां इरफाना परवीन गृहणी हैं। नोमान कहते हैं कि आगे जॉब नहीं, रिसर्च में बढ़ना है। खासकर आर्गनिक खेती को बढ़ावा देने की दिशा में काम करना है। क्योंकि अच्छे स्वास्थ्य के साथ आर्गनिक खेती में अपार संभावना है। 
माता पिता के आशीर्वाद से मिली सफलता
इलेक्ट्रिकल में सर्वाधिक अंक पाकर गोल्ड मेडल हासिल करने वाले रायबरेली निवासी दिवाकर यादव वर्तमान समय में बिजली विभाग में जूनियर इंजीनियर है और लखनऊ में ही तैनात हैं। उनके पिता रामनरेश यादव किसान व मां राजकुमारी गृहणी है। वह अपनी सफलता का श्रेय अपने माता पिता को देते हैं। 
error: Content is protected !!