Wednesday, January 20, 2021
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बाला जी की यात्रा में शामिल हुए सैकड़ों भक्त ,चेन्नई से आयी रेश्मी साड़ी और श्रंगार की वस्तुएं

मोक्ष के लिए खुला बैकुंठ द्वार

लखनऊ मधुर मोहन तिवारी –बैकुंठ एकादशी पर बंथरा के बालाजी श्री वैंक्टेश्वर मन्दिर में मंगलवार को सर्वार्थ सिद्धि योग में सैकड़ों की संख्या में भक्तों ने जनजन के आराध्य बालाजी के दर्शन, पूजन अर्चन किये। साल में केवल इसी दिन मोक्षदा एकादशी पर बालाजी मंदिर के बैकुंठ द्वार खोले जाते हैं। उसी परंपरा का अनुसरण करते हुए 27वां बालाजी पालकी यात्रा का आयोजन मंदिर परिसर में किया गया।

विभिन्न जनपदों से आए बालाजी के भक्त
मंदिर के संस्थापक व्यवस्थापक जी.एम.विश्वनाथन की उपस्थिति में भोर के पांच बजे से ही भक्तों ने बालाजी के दर्शन शुरू कर दिये थे। इस क्रम में लखनऊ समेत कानपुर, उन्नाव और सीतापुर सहित अन्य जनपदों से आए भक्तों ने विष्णु सहस्त्र नाम का पाठ किया। इसमें भक्तों ने भगवान विष्णु के सौ नामों का सरस पाठ किया। इसमें हर उम्र के भक्त शामिल थे।
अमेरिकन डायमेंड से सजा मुकुट सहस्त्रनाम पूजन के बाद बैकुंठ द्वार का पूजन किया गया। वहां भगवान विष्णु के वाहन गरुण का पटका लगाया गया था। इसमें मध्य में भगवान विष्णु का बिम्ब था। उसके दोनों ओर चक्र, शंख, राम भक्त हनुमान और गरुण चित्रित थे।

पूजन के बाद ही गरुण पटका हटाया गया। उसके बाद ही पालकी यात्रा बैकुंठ द्वार से रवाना हुई। पालकी यात्रा के लिए उत्सवी पंच धातु की प्रतिमाओं को चेन्नई से आयी रेश्मी साड़ी और श्रंगार की वस्तुएं अर्पित की गई। सबसे आकर्षक रहा अमेरिकन डायमेंड का भव्य मुकुट। उत्सवी मूर्तियों में बाला जी की प्रतिमा के बांयी ओर पद्मावती श्रीदेवी के रूप में और दाएं ओर आण्डाल की प्रतिमा भूदेवी के रूप में विराजमान रहीं। भक्तों ने 101 नारियल अर्पित किये।

अनुयायियों ने कंधे पर भगवान की पालकी को रख कर मंदिर परिसर में तीन बार परिक्रमा की। उसके बाद महा आरती की गई। आरती के बाद भक्तों ने जयकारे लगाये। इस अवसर पर वहां सावित्री विश्वनाथन की अगुआई में उपमा का प्रसाद बांटा गया।