Tuesday, August 11, 2020
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आंचलिक विज्ञान नगरी में तत्वों की आवर्त सारणी पर आधारित प्रदर्शनी का उद्घाटन

लखनऊ Ap3news-आंचलिक विज्ञान नगरी में प्रदर्शित एक नवीन प्रदर्शनी ‘‘आवर्त सारणी का उत्सव’’ का उद्घाटन डा0 तपस कुमार कुण्डू, निदेशक, सीएसआईआर-सीडीआरआई द्वारा सोमवार को किया गया। उद्घाटन अवसर पर आवर्त सारणी पर आधारित एक लोकप्रिय विज्ञान व्याखान का भी आयोजन किया जिसे डा0 पी.के. माथुर, पूर्व विभागाध्यक्ष, रसायन विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय द्वारा बड़े ही रोचक ढंग से प्रस्तुत किया गया। इस अवसर पर डा0 वी0पी0 शर्मा, उपनिदेशक, सीएसआईआर-आईआईटीआर, डा0 आनंद अखिला, पूर्व वरिष्ठ वैज्ञानिक, सीएसआईआर-सीमैप सहित लगभग 180 की संख्या में गणमान्य अतिथि, विद्यार्थी एवं शिक्षकगण मौजूद थे।   
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अपने उद्घाटन सम्बोधन में बोलते हुए डा0 तपस कुमार कुण्डू ने कहा कि मैं आज इस विशेष प्रदर्शनी का उद्घाटन करते हए मैं अत्यंत गौरवान्वित हो रहा हुँ। इस विलक्षण प्रदर्शनी को प्रस्तुत करने के लिए उन्होंने आंचलिक विज्ञान नगरी, लखनऊ के अधिकारियों और कर्मचारियों की सराहना की जिनके अथक प्रयास से इस विशेष प्रदर्शनी का निर्माण एवं प्रदर्शन सम्भव हुआ है। उन्होंने बच्चां को प्रेरित करते हुए कहा कि जैसे-जैसे हम बड़े होते हैं वैसे ही तत्वों को समझने की हमारी जिम्मेदारी भी बढ़ती है। आवर्त सारणी रसायन विज्ञान, जीन व आनुवांशिक आविष्कारों को जोड़ने की एक कड़ी की तरह है। उन्होंने आगे कहा कि यह प्रदर्शनी तत्वों के ज्ञान से लबरेज है अतः प्रदेश के छात्र-छात्रायें इस प्रदर्शनी का भरपूर लाभ उठाये। 
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इस अवसर पर अपना लोकप्रिय विज्ञान व्याख्यान प्रस्तुत करते प्रो0 पी0के0 माथुर ने बताया कि तत्वों के वर्गीकरण के लिए मेंडेलीव, विलियम रामसे, मोजले, सीबर्ग, नेलबोहर, लीनियस पॉलिंग के द्वारा दिये गये योगदानों की विस्तारपूर्वक व्याख्या की। इसके अतिरिक्त उन्होंने तत्वों के आवर्ती गुणों से अवगत कराते हुए हाईड्रोजन के वर्गीकरण की दुविधा से भी अवगत कराया। उन्होंने भूपटल पर प्रचुर मात्रा में पाये जाने वाले तत्व ऑक्सीजन, ओसमियम, लीथियम, पारा, गैलियम, नोबेल गैंसे इत्यादि के गुणों एवं उपयोगों से विद्यार्थियों को परिचित कराया।      
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आंचलिक विज्ञान नगरी, लखनऊ के परियोजना समायोजक डा0 राज मेहरोत्रा ने अतिथियों एवं श्रोताओं का स्वागत करते हुए कहा कि यह प्रदर्शनी तत्वों को आसानी से समझने के लिए आवर्त सारणी के निर्माण की कहानी है जिसमें विभिन्न वैज्ञानिकों के योगदान को रोचक ढ़ंग से प्रस्तुत किया गया है। साथ ही उन्होंने बताया कि संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2019 को रासायनिक तत्वों  की आवर्त सारणी के अंतर्राष्ट्रीय वर्ष के रूप में नामित किया है। वर्ष 2019 को इंटरनेशनल यूनियन ऑफ प्योवर एंड एप्लाइड केमिस्ट्री के रूप में चिह्नित किया गया है। यह रसायन विज्ञान के इतिहास में कई अन्य् मील के पत्थिर भी चिह्नित करता है, जिसमें 350 वर्ष पहले फॉस्फोरस की खोज, 1789 में एंटोनी लैवॉशियर द्वारा 33 तत्वों के वर्गीकरण और साथ ही 190 साल पहले जॉन वाल्फरगैंग दोईबेरिनेर द्वारा ट्रायड का सिद्धांत का निर्माण सम्मिलित है। रासायनिक तत्वों और उसके अनुप्रयोगों की आवर्त सारणी पर एक अंतर्राष्ट्रीय वर्ष की घोषणा करते हुए, संयुक्त राष्ट्र ने रसायन विज्ञान के महत्व के विषय में वैश्विक जागरूकता बढ़ाने की मान्यता प्रदान की है कि किस प्रकार समाज को सांस्कृतिक, आर्थिक और राजनीतिक पहलुओं को एक आम भाषा के माध्यम से जोड़ने के लिए आवर्त सारणी प्रमुख कड़ी है। 
यह प्रदर्शनी आंचलिक विज्ञान नगरी, लखनऊ में विद्यार्थियों एवं दर्शकों के लाभार्थ अगले तीन महीनों तक प्रदर्शित रहेगी।