Sunday, September 20, 2020
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काश समय थम जाता…

काश ( कविता)

काश समय थम जाता
मेरा बचपन भी रुक जाता।
मां की गोदी होती
हाथ में रोटी होती।
दादा जी जब बुलाते,
मैं दौड़ा दौड़ा आता।
काश समय थम जाता…

दादी, नानी, चाची
सबकी आंखों का तारा।
घर की चौखट तो क्या
पूरे गांव का राज दुलारा।

खेतों की पगडंडी पर,
मैं गिरता पड़ता जाता।
काश समय थम जाता।।

संध्या के अंधियारे में,
वादी जब दीया जलाती।

सुंदर मधुर स्वरों में,
वे प्रभु की आरती गाती।
काशी, मथुरा के जैसा
माहौल वहां सज जाता
काश समय थम जाता।।

डॉ सुषमा श्रीवास्तव
शिक्षिका