Monday, August 10, 2020
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ईआरपी के जल्दबाजी के विरोध में है अभियंता, 31 जुलाई को करेंगे आंदोलन

लखनऊ – बिजली अभियन्ताओं के उत्पीड़न, ऊर्जा निगमों में फिजूलखर्ची रोकने, अन्य ज्वलन्त समस्याओं के निराकरण न होने से आन्दोलित बिजली अभियन्ताओं ने पावर कारपोरेशन में लगभग 250 करोड़ के ई0आर0पी0 प्रोजेक्ट को बिना किसी तैयारी, बिना आवश्यक इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित किये 01 अगस्त,2020 से इसे लागू करने के आदेश, जिद व खानापूर्ति कर चहेती फर्म को भुगतान करने की जल्दबाजी से प्रबन्धन व आई0टी0 सेल में बैठे उनके चहेतों की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए बिजली अभियन्ताओं ने इसे एक बड़ा घोटाला बताते हुए मांग की कि कोरोना काल में गम्भीर वित्तीय दबाव के कारण पावर कारपोरेशन में ऐसी फिजूलखर्ची व सरकारी धन की लूट तुरन्त बंद की जाये और वर्तमान ई0आर0पी0 प्रस्ताव को पूर्ण तैयारी के साथ लागू करने हेतु 01 साल के लिए स्थगित रखा जाये। विदित हो कि पावर कारपोरेशन में फर्म मे0 एसेन्चर सल्यूशन्स प्रा0लि0, नई दिल्ली के साथ माह फरवरी,2019 में लगभग 250 करोड़ का अनुबन्ध किया गया है तथा प्रबन्धन ने इसे 01 अगस्त,2020 से लागू करने के आदेश दिये हैं परन्तु आधी-अधूरी तैयारियों, क्षेत्रों में आवश्यक इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित न कर पाने, मॉक ड्रिल न कराने, आवश्यक ट्रेनिंग के नाम पर खानापूर्ति कराकर इसे जल्दबाजी में लागू करने की जिद का विरोध किया है।
विद्युत अभियन्ता संघ के अध्यक्ष वी0पी0 सिंह व महासचिव प्रभात सिंह ने बयान जारी कर कहा कि ई0आर0पी0 साफ्टवेयर बनाना कोई राकेट साइंस नहीं है वर्तमान में यह कई विभागों/संस्थानों में प्रचलित है मात्र विभागीय आवश्यकताओं के अनुसार इसमें मामूली परिवर्तन किया जाना होता है। वर्तमान में इसी प्रकार का साफ्टवेयर महाराष्ट्र में 94.79 करोड़ में लागू किया गया जबकि महाराष्ट्र में कुल उपभोक्ताओं की संख्या 2.73 करोड़ है जबकि उ0प्र0 में कुल उपभोक्ताओं की संख्या 2.98 करोड़ है। साथ ही अन्य प्रदेशों में इस प्रकार के प्रोजेक्ट पर 60 से 70 करोड़ रूपये ही व्यय हुए हैं। इसके पूर्व भी आई0टी0 सेल में कार्यरत प्रबन्धन के चहेते अधिकारी द्वारा ऐप/पोर्टल आदि को बिना किसी परीक्षण के लागू कर दिया गया था जिसका खामियाजा आजतक प्रदेश के उपभोक्ता एवं अभियन्ता भुगत रहे हैं। झटपट पोर्टल को लागू करे लगभग 02 वर्ष का समय व्यतीत हो चुका है परन्तु आजतक यह पोर्टल पूर्ण रूप से त्रुटिहीन नहीं हो पाया है। इसी प्रकार हेल्पडेस्क के पोर्टल पर मोबाइल फोन सुविधा उपलब्ध होने के उपरान्त भी आज तक सुचारू रूप में कार्यरत न होने से इसके माध्यम से उपभोक्ताओं और अभियन्ताओं को सही सूचना प्राप्त नहीं हो पाती है।
अभियन्ता संघ मांग करता है कि ई0आर0पी0 को सुचारू रूप से लागू करने के लिए प्रचलित मानकों के अनुरूप पहले एक वीटा वर्जन(डेमो) उपलब्ध होना चाहिए ताकि सम्बन्धित अधिकारी/कार्मिक ई0आर0पी0 पोर्टल के सुचारू ऑपरेशन हेतु सुपरिचित हो सके तथा ई0आर0पी0 लागू होने की दशा में अधिकारी/कार्मिक त्रुटिहीन रूप से उक्त पोर्टल पर कार्य कर सके।
अतः वर्तमान में लगभग 250 करोड़ रूपये व्यय कर ऊर्जा निगम प्रबन्धन द्वारा बिना किसी तैयारी के ई0आर0पी0 लागू करना प्रदर्शित करता है कि ऊर्जा निगम प्रबन्धन सरकारी धन की लूट व भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रहा है और इस पूरे भ्रष्ट तंत्र के पीछे उ0प्र0पा0का0लि आई0टी0 सेल में प्रबन्धन के चाटुकार अधिकारी ई0आर0पी0 प्रोजेक्ट को बिना किसी तैयारी के जैसे – इन्फ्रास्ट्रक्चर का डेवेलप न होना, ई0आर0पी0 पोर्टल पर कार्य करने वाले अधिकारी/कार्मिक को किसी प्रकार की ट्रेनिंग नहीं दिया जाना एवं ट्रेनिंग के नाम पर मोबाइल/लैपटॉप के माध्यम से ऑनलाइन ट्रेनिंग का दिखावा किया जा रहा है। जबकि ई0आर0पी0 लागू करने से पहले सम्बन्धित अधिकारी/कार्मिकों के किसी प्रकार के संशय का निराकरण समय रहते हुए हो सके ताकि ई0आर0पी0 लागू होने के पश्चात सम्बन्धित व्यवस्था न्यूनतम त्रुटियां की सम्भावना रहे।
ई0आर0पी0/एप/पोर्टल के नाम पर हो रही फिजूल खर्ची व सरकारी धन की बर्बादी व लूट पर प्रबन्धन द्वारा आंखे मूंदे रखना प्रबन्धन पर सवालिया निशान लगाता है। सरकार को संज्ञान लेकर एक समिति का गठन कर समीक्षा करना चाहिए।


प्रबन्धन ने ई0आर0पी0/ऐप/पोर्टल आदि कार्यों हेतु अपने सीधे नियंत्रणाधीन अधीक्षण अभियन्ता (ई0एण्डएम0) के अन्तर्गत तथाकथित आई0टी0 सेल बना रखा है जिसका मुख्य कार्य प्रबन्धन की चाटुकारिता व अधीनस्थों का उत्पीड़न करते हुए सरकारी धन की लूट व भ्रष्टाचार करना है जिसका जीता-जागता उदाहरण 250 करोड़ का ई0आर0पी0 प्रोजेक्ट व विभिन्न ऐप/पोर्टल है। ई0आर0पी0 लागू करने की जल्दबाजी के कारण फर्म के बैंगलोर/मुम्बई में बैठे प्रतिनिधियों के द्वारा मोबाईल पर वीडियो कॉलिंग/गूगल मीट आदि के माध्यम से ऑनलाइन ट्रेनिंग दिये जाने की खानापूर्ति की जा रही है। जबकि अनुबन्ध के अन्तर्गत फर्म के प्रतिनिधियों को प्रत्येक सर्किल में जाकर वहां कई दिन की ट्रेनिंग दिया जाना प्राविधानित है। फर्म के प्रतिनिधि कोरोना का बहाना बनाकर बैंगलोर/मुम्बई से वीडियो कॉल पर ट्रेनिंग की खानापूर्ति कर रहे हैं। मोबाईल पर वीडियो कॉल/वीडियो मीट में जहां बातचीत तक करने में तमाम कठिनाईयां परिलक्षित हो रही हैं वहीं 3-4 इंच की स्क्रीन पर 250 करोड़ रूपये के भारी भरकम साफ्टवेयर की ट्रेनिंग कराया जाना हास्यास्पद है। पूर्व में व अभी तक विभाग बिना ई0आर0पी0 के चल रहा है तथा भविष्य में भी बिना ई0आर0पी0 के चल सकता है तो कोरोना काल के गम्भीर वित्तीय संकट में ऐसी फिजूलखर्जी का क्या औचित्य है। उन्होंने आगे कहा कि प्रबन्धन के चहेते ये चाटुकार, जिन्हें आईटी सेल का प्रभारी बनाया गया है, उन्होंने अपने अधीन लगभग 40 सहायक अभियन्ताआें को तैनात करा रखा है जबकि क्षेत्रों में एवं अन्य कार्यालयों में उपखण्ड अधिकारी/सहायक अभियन्ताओं की महती आवश्यकता है। उन्होंने अपना भविष्य सुरक्षित करते हुए निदेशक (आईटी) के पद का सृजन भी करवा लिया है तथा अर्हता शर्तें भी अन्य निदेशकों से अलग बनवाई हैं जिनसे उनका ही चयन किया हो सके। अपने ऊपर किसी मुख्य अभियन्ता की भी तैनाती नहीं होने दे रहे है जबकि मुख्य अभियन्ता का पद रिक्त चल रहा है।
पदाधिकारियां ने कहा कि अभियन्ताआें के उत्पीड़न, ऊर्जा निगमों में फिजूल खर्ची व ज्वलन्त समस्याओं के निराकरण न होने से प्रदेश के अभियन्ताओं में व्यापक रोष व आक्रोश है और वे 31 जुलाई के बाद आन्दोलन की रूप-रेखा तय करेंगे। इस बाबत अध्यक्ष पावर कारपोरेशन को नोटिस प्रेषित की जा चुका है। उन्होंने सरकार से मांग की कि ऊर्जा निगमों में फिजूलखर्ची बन्द करने, भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वाले को चिन्हित कर उनके विरूद्ध कार्यवाही करें तथा प्रबन्धन को अभियन्ताओं की ज्वलन्त समस्याओं का निराकरण अतिशीघ्र करने हेतु निर्देशित करें।