Tuesday, June 25, 2019
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बिल्डिंग द बायोइकोनॉमी ईकोसिस्टम: इग्नायटिंग माइंड्स, स्परिंग इनोवेशन’ : डॉ. रेनू स्वरूप

लखनऊ संवाददाता – केंद्रीय औषधीय एवं सगंध पौधा संस्थान (सीएसआईआर-सीमैप) लखनऊ में आज, दिनांक 10 जनवरी 2019 को डॉ. रेनू स्वरूप, सेकरेटरी, डिपार्ट्मेंट ऑफ बायोटेक्नोलॉजी, भारत सरकार द्वारा ‘बिल्डिंग द बायोइकोनॉमी ईकोसिस्टम: इग्नायटिंग माइंड्स, स्परिंग इनोवेशन’ विषय पर छठवां हीरक जयंती व्याख्यान दिया गया। इससे पूर्व डॉ मंजू शर्मा, डॉ त्रिलोचन महापात्रा, डॉ आर ए माशेलकर, प्रो. राकेश भट्नागर और प्रो. वी नागराजा द्वारा व्याख्यान दिए जा चुके हैं।
कार्यक्रम के दौरान, संस्थान के निदेशक, प्रो. अनिल के त्रिपाठी द्वारा मुख्य अतिथि, डॉ. रेनू स्वरूप का अभिनंदन फूलों का गुलदस्ता एवं खस से बनी जैकेट देकर किया गया। प्रो. त्रिपाठी ने उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों और दर्शकों को संस्थान के पिछले साठ वर्षों के योगदान के बारे में बताया। उन्होने संक्षेप में मिंट क्रांति, मलेरिया से लड़ने में आर्टेमिसिया की भूमिका तथा बीजीआर-34 के बारे में भी बताया। उन्होने विस्तार से बताया कि सीमैप के द्वारा एरोमा मिशन के अंतर्गत पूरे भारतवर्ष में जलभराव, सूखाग्रस्त एवं लवणिया भूमि पर सगंध पौधों की खेती के द्वारा किसानों की आय में बढ़ोत्तरी की जा रही है। उन्होंने बताया कि डीबीटी के सहयोग से सीमैप द्वारा किए गए विभिन्न अनुसंधान कार्यों के फलस्वरूप ही आज सीमैप को बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर जाना जाता है ।


इस अवसर पर डॉ. आलोक कालरा, अध्यक्ष, आयोजन समिति द्वारा मुख्य अतिथि का परिचय व्याख्यान में उपस्थित वैज्ञानिकों तथा शोधार्थियों को किया । डॉ. कालरा ने बताया कि डॉ. रेनू स्वरूप के नेतृत्व में डीबीटी द्वारा अब तक लगभग 1000 एंटरप्रेनर्स को बढ़ावा दिया जा चुका है ।

डॉ. रेनू स्वरूप ने अपने व्याख्यान में कहा कि आज के युग में भारत जैसे कृषि प्रधान देश में जैव अर्थव्यवस्था का अत्यधिक महत्व है । उन्होने जोर देकर यह भी कहा कि भारत को विश्व स्तर पर नेतृत्व प्रदान करने के लिए इनोवेशन को बढ़ावा देना होगा जिसे राष्ट्रीय प्रयोगशालाए एवं विश्वविद्यालयों द्वारा प्रोत्साहित करना होगा । उन्होने सभा में उपस्थित युवा शोधार्थियों को बताया कि वे अपने विचारों को इनोवेशन के द्वारा प्रज्वलित करके एंटरप्रेनरशिप द्वारा राष्ट्र निर्माण में योगदान करें। उन्होने अपने व्याख्यान में भविष्य की टेक्नोलॉजी जैसे बिग डेटा, आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस आदि पर विस्तार से बताया । डीबीटी द्वारा सफल एंटरप्रेनर्स के बारे में भी बताया ।
प्रो. त्रिपाठी ने मुख्य अतिथि को शॉल और स्मृति-चिन्ह के साथ सम्मानित किया । इस अवसर पर डीबीटी द्वारा प्रायोजित परियोजना की प्रशिक्षण पुस्तिका का भी विमोचन किया गया । इस अवसर पर सीएसआईआर-आईआईटीआर के निदेशक, डॉ आलोक धवन, सीएसआईआर-एनबीआरआई के निदेशक प्रो. एस के बारिक , डॉ. वी पी काम्बोज, प्रो. पी के सेठ और संस्थान के वैज्ञानिक उपस्थित थे।