Monday, April 22, 2019
Home > Top Photos > लोक संस्कृति शोध संस्थान द्वारा आयोजित सांस्कृतिक प्रस्तुति ‘चरखवा चालू रहे’

लोक संस्कृति शोध संस्थान द्वारा आयोजित सांस्कृतिक प्रस्तुति ‘चरखवा चालू रहे’

लखनऊ एपी3– राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के 150वें जयन्ती वर्ष के उपलक्ष्य में लोक संस्कृति शोध संस्थान द्वारा आयोजित सांस्कृतिक प्रस्तुति ‘चरखवा चालू रहे’ में गाँधी जीवन्त हो उठे। मंगलवार को राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह में बापू पर आधारित लोकगीतों की प्रस्तुति कार्यक्रम का शुभारम्भ उ.प्र. संगीत नाटक अकादमी की सभापति डा. पूर्णिमा पाण्डे, डा. योगेश प्रवीन, डा. विद्याविन्दु सिंह, डा. रामबहादुर मिश्र, आरती पाण्डेय ने दीप प्रज्ज्वलन कर किया। इस अवसर पर संस्थान द्वारा लोक संस्कृति संरक्षण में उल्लेखनीय योगदान देने वाली विभूतियों का सम्मान भी किया गया।

प्रस्तुति का शुभारम्भ पारम्परिक लोक वाद्यों हारमोनियम, ढोलक, डफली, घण्टी, शंख, झाल व घुँघरु के साथ श्रीराम वन्दना ‘रघुपति राघव राजाराम’ से हुआ। इसके बाद गाँधी सोहर ‘जन्मे हैं देसवा के लाल, भारत केरे भाल’, अवधी गाँधी गीत इक दुबर पातर मानुस कै जान बड़ो भारी’ अवधी गाँधी कजरी ‘अरे रामा भारत भवा आजाद, सुराज मिलि गवा रे हरी’ जैसे गीतों से बापू को याद किया गया। गाँधी लोक गीत ‘मोरे चरखे का टूटै न तार, चरखवा चालू रहे’ अवधी गाँधी गीत ‘हमका कइसन दिहिन उपहार बापू’, भोजपुरी गाँधी कजरी ‘गाँधी बाबा के आई गईल सुधिया न’ गाँधी चैती ‘भारत किहिन आजाद हो रामा, हमार गाँधी बाबा’, अवधी गाँधी गीत ‘करमचन्द कै लाल माता पुतली केरे जाये’ तथा गाँधी होली गीत ‘गाँधी खेले ऐसन होली देस मां’ को लोगों ने खूब सराहा। संगत कलाकारों में हारमोनियम पर कमलाकान्त, ढोलक व डफली पर मुन्ना अनवर, घण्टी-शंख-झाल व घुँघरु पर सोमनाथ चौरसिया ने प्रभावी संगत की। मंच का संचालन राखी अग्रवाल ने किया। प्रस्तुति में प्रतिभागी कलाकार के रुप में इन्दरा श्रीवास्तव, मधु श्रीवास्तव, वन्दना शुक्ला, उषा पाण्डिया, रंजना शंकर, कीर्तिका श्रीवास्तव, गौरव गुप्ता, सौरभ कमल, अंशुमान मौर्य, भूषण अग्रवाल, इंजी. दिनेश श्रीवास्तव एवं तेजस्वी गोस्वामी आदि शामिल रहे।
लोक संस्कृति शोध संस्थान की सचिव सुधा द्विवेदी ने बताया कि बापू के जयन्ती वर्ष के उपलक्ष्य में प्रस्तुतियों को कार्यशाला के माध्यम से तैयार किया गया। 15 जनवरी से 21 जनवरी तक चली कार्यशाला में प्रो. कमला श्रीवास्तव ने सभी प्रतिभागियों को लोक गीतों का पूर्वाभ्यास कराया। इस अवसर पर कार्यशाला समन्वयक मधु श्रीवास्तव, संस्थान के विशेष कार्याधिकारी, होमेन्द्र कुमार मिश्र, जनसम्पर्क अधिकारी जादूगर सुरेश कुमार, थियेटर एवं फिल्म वेलफेयर एसोसिएशन के सचिव दबीर सिद्दीकी, मंजू चक्रवर्ती, उर्मिला पाण्डेय, रविशंकर ‘रवि’, जनवीणा चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष दीन दयाल तिवारी आदि मुख्य रुप से उपस्थित रहे।

*इनको मिला सम्मान:*
विदुषी गायिका प्रो. कमला श्रीवास्तव’, लेखक व निर्देशक अनिल मिश्र ‘गुरु जी’ तथा लोक विधाओं के संरक्षण, उन्नयन के लिए सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग के सेवानिवृत्त संयुक्त निदेशक अशोक बनर्जी को ‘लोक रत्न’ सम्मान प्रदान किया गया।

*आर्थिक समृद्धि के लिए बनाया चरखे को प्रतीक*
उ.प्र. संगीत नाटक अकादमी की सभापति डा. पूर्णिमा पाण्डे ने कहा कि सारा विश्व गांधी को मानवता के पुजारी के रुप में जानता है। वे स्वच्छाग्रही थे तथा सत्य और अहिंसा उनका सबसे बड़ा हथियार था। देश को आर्थिक रुप से समृद्ध बनाने के लिए उन्होंने चरखे को प्रतीक बनाया।

(सुधा द्विवेदी)
सचिव