Thursday, October 1, 2020
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कविता ‘सात’ -कवियत्री डॉ सुषमा श्रीवास्तव

सात (कविता) सूरज की सुनहरी किरणों में सात रंग छिपते हैं, सरगम की सुरीली धुन में सुर सात ही सजते हैं। सात रंग से सज करके इंद्रधनुष बन जाता है। सात दिनों का एक समूह सप्ताह कहलाता है। सात योगियों का समूह सप्तऋषि बन अमर हुआ, सात पुरी ही मोक्ष द्वार की, फिर भी मानव

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काश समय थम जाता…

काश ( कविता) काश समय थम जाता मेरा बचपन भी रुक जाता। मां की गोदी होती हाथ में रोटी होती। दादा जी जब बुलाते, मैं दौड़ा दौड़ा आता। काश समय थम जाता... दादी, नानी, चाची सबकी आंखों का तारा। घर की चौखट तो क्या पूरे गांव का राज दुलारा। खेतों की पगडंडी पर, मैं गिरता पड़ता जाता। काश समय थम

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