Thursday, December 13, 2018
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फसल चक्र मे औषधीय एवं सगंध पौधों की खेती का समावेश कर किसान अपनी आमदनी बढ़ाएं

लखनऊ। विशेष संवाददाता
सीएसआईआर द्वारा प्रायोजित परियोजना ‘एरोमा मिशन’ के अंतर्गत केन्द्रीय औषधीय एवं सगंध पौधा संस्थान (सीमैप) में तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। किसानों की आय को दुगुना करने के उद्देश्य से आयोजित कार्यक्रम का उदघाटन सीमैप के डॉ. आलोक कालरा, मुख्य वैज्ञानिक एवं कार्यकारी निदेशक, सीएसआईआर-सीमैप ने किया। जिसमे देश के 13 राज्यों उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, नई दिल्ली, हरियाणा, मेघालय, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, छत्तीसगढ़, राजस्थान एवं झारखंड से आए 74 प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं।
डॉ. आलोक कालरा ने कहा कि परंपरागत फसलों के फसल चक्र मे औषधीय एवं सगंध पौधों की खेती का समावेश कर किसान अपनी आमदनी को बढ़ा सकते हैं । परंपरागत फसलों को जंगली जानवरों व मवेशियों से किसानों को भारी नुकसान हो रहा है, इस नुकसान की भरपाई औषधीय एवं सगंध फसलों की खेती अपनाकर कर सकते हैं। उन्होंने सभी प्रतिभागियों से आहवाहन किया कि आप सीमैप में औषधीय फसलों के साथ-साथ सगंध फसलों पर भी समुचित जानकारी लेकर जाए तथा इस जानकारी को दूसरे किसानो से भी साझा करें ताकि ली गई जानकारी से दूसरे किसान भी लाभ ले सकें । डॉ. कालरा ने सभी प्रतिभागियों को सीएसआईआर की परियोजना ‘एरोम मिशन’ के बारे में भी बताया। डॉ. संजय कुमार ने तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम की पूर्ण जानकारी प्रदान की। डॉ. सौदान सिंह ने मिंट के उत्पादन की उन्नत कृषि क्रियाएँ एवं आर्थिक महत्व पर ,डॉ. एच पी सिंह ने खस एवं डॉ. संजय कुमार ने रोशाघास के उत्पादन तकनीकी तथा डॉ. वी.के.एस. तोमर ने नीबूघास के उत्पादन की उन्नत कृषि तकनीकी पर प्रतिभागियों को विस्तार से जानकारी दी । कार्यक्रम के तकनीकी सत्र में राम प्रवेश एवं दीपक कुमार वर्मा ने प्रतिभागियों को सीमैप के प्रदर्शन प्रक्षेत्र का भ्रमण कराया। इस अवसर डॉ. आलोक कालरा, डॉ. सौदान सिंह, डॉ. वी.के.एस. तोमर, डॉ. संजय कुमार, डॉ. आर के श्रीवास्तव, डॉ. एच पी सिंह व डॉ. राम सुरेश शर्मा आदि भी उपस्थित थे ।