Thursday, December 13, 2018
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सीमैप छ: दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन उप मुख्यमंत्री डॉ दिनेश शर्मा तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकि मंत्री द्वारा हुवा

छ: दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम-‘डायवर्सिटी, डॉक्युमेंटेशन एवं जीन बैंकिंग ए डाटाबेस फॉर मेडिसिनल प्लांट्स’ आईओआरए सदस्य देशों के लिए, का उद्घाटन माननीय उप मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश द्वारा आज सीमैप में किया गया

आज सीमैप में औषधीय पौधों की डायवर्सिटी, डॉक्युमेंटेशन एवं जीन बैंकिंग एवं डाटाबेस पर आईओआरए सदस्य देशों के लिए छ: दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन डॉ दिनेश शर्मा, माननीय उप मुख्यमंत्री तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकि मंत्री द्वारा किया गया। श्रीमति कल्पना अवस्थी, प्रमुख सचिव, पर्यावरण तथा वन, उत्तर प्रदेश सरकार इस कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि थी।


इस कार्यक्रम के उद्घाटन में प्रो. अनिल कुमार त्रिपाठी, निदेशक, सीएसआईआर-सीमैप ने मुख्य अतिथि का स्वागत हल्दी की पौध देकर किया जो कि भारतीय आयुर्वेद में एक महत्वपूर्ण पौधा है। प्रो. त्रिपाठी ने इस अवसर पर बताया कि कई सदियों से भारत के हिंद महासागर देशों के साथ मजबूत रिश्ते रहे हैं और इस प्रशिक्षण कार्यक्रम से इन सदस्य देशों को औषधीय पौधों का डाटाबेस तथा प्रौद्योगिकियों को मानकीकृत करने मे मदद मिलेगी जिससे कि औषधीय पौधों के व्यापार में बढ़ोत्तरी सम्भव हो सकेगी। प्रो. त्रिपाठी ने यह भी बताया कि भारत सरकार द्वारा सीमैप को आईओआरए देशों के औषधीय पौधों के अनुसंधान के लिए समन्वय केंद्र बनाया गया है। इस अवसर पर उपस्थित अतिथिगण को उन्होने यह भी बताया कि किस तरह मेंथोल मिंट की खेती से 3 दशकों में उ.प्र. के किसानों ने भारत को मिंट ऑयल के निर्यात मे नम्बर 1 देश बना दिया है जिससे देश में लगभग 6000 करोड़ का व्यापार प्रति वर्ष होता है। उन्होने प्रतिबद्धता जतायी कि सीमैप भारत सरकार के ‘किसानों की आय को दोगुनी’ मिशन में औषधीय एवं सगंध पौधों की खेती परंपरागत कृषि के साथ अपनाने के लिए कई कार्यक्रम चला रहा है।


इस दौरान डॉ. टी मीरावडी, निदेशक, आईओआरए-आरसीएसटीटी ने भारत सरकार को इस प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने के लिए धन्यवाद दिया और उन्होने यह भी बताया कि भारत हर समय आईओआरए सदस्य देशों के विकास मे व्यापक रूप से हर तरह की मदद कर रहा है। इसी अवसर पर श्रीमति कल्पना अवस्थी, प्रमुख सचिव, पर्यावरण तथा वन, उत्तर प्रदेश सरकार ने अपने सम्बोधन भाषण में आशा जतायी कि इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के द्वारा जो भी परिणाम निकलेंगे वह देश के नीति-निर्धारकों तक पहुंचाये जाएंगे। उन्होने सुझाव दिया कि आज की इस टेक्नॉलजी के युग में मोबाइल टेक्नॉलजी और मीडिया चैनलों का भरपूर प्रयोग कर के इस तरह की कार्यशालाओं के परिणाम का किसानों और नीति-निर्धारकों तक पहुंचाया जायेगा।
अपने उद्घाटन भाषण में डॉ दिनेश शर्मा, माननीय उप मुख्यमंत्री तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकि मंत्री, उत्तर प्रदेश ने प्रशिक्षण कार्यक्रम में आए हुए अंतर्राष्ट्रीय प्रतिभागियों का स्वागत किया। उन्होने अपने भाषण में वैज्ञानिकों से अपील की कि वे वैज्ञानिक सिद्धांतों के द्वारा आयुर्वेदिक ज्ञान तथा उसके लाभों को हिंद महासागर देशों के जन मानस तक फैलाने में मदद करें। उन्होने सीएसआईआर-सीमैप के द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि लखनऊ स्थित अनुसंधान केंद्रों के द्वारा हमारे परम्परागत ज्ञान को नवीनतम खोजों के द्वारा बेहतर मान्यता और स्वीकारिता प्राप्त हो रही है, जिससे हर्बल उद्योग का भारत की अर्थव्यवस्था में योगदान काफी गुना बढ़ गया है। उन्होने जोर देकर कहा कि औषधीय एवं सगंध पौधों का परंपरागत कृषि के साथ खेती करने से किसानों की आय को दोगुना किया जा सकता है। डॉ. शर्मा ने बताया कि सीमैप द्वारा विकसित ‘खस ऐग्रोटेक्नॉलजी’ बाढ़-ग्रस्त इलाकों के लिए काफी प्रभावी हो सकती है क्योंकि यह पौधे न केवल बाढ़ में जीवित रह सकते हैं बल्कि किसानों को अच्छी आमदनी भी दे सकते हैं। इन पौधों के द्वारा नदियों में होने वाले प्रदूषण को भी कम किया जा सकता है।
इस अवसर पर प्रशिक्षण कार्यक्रम के एक ट्रेनिंग मैनुअल का भी विमोचन किया गया और उसके साथ-साथ हर्बल शैम्पू को बाजार के लिए जारी किया गया। यह उत्पाद मेसर्स सुजाता बायोटेक, चेन्नई को सीमैप द्वारा 2017 में लाइसेंस किया गया था और उसे कम्पनी ने ‘वेल्वेट हर्बल शैम्पू’ के नाम से बाजार मे उतारा है। यह शैम्पू वैज्ञानिक तकनीकि से बनाया गया है जिसमे हर्बल अव्ययों का उपयोग किया गया है और इससे डैंड्रफ को रोका जा सकता है। यह शैम्पू पूरी तरह से नैचुरल एवं सुगंधित तेलों से बना हुआ है।
इस दौरान एक हर्बल किट जो कि गुड मॉर्निंग किट के नाम से बनायी गयी है, वह भी माननीय उप मुख्यमंत्री द्वारा रिलीज की गयी है जो कि एंट्रप्रेनेयर्स को टेक्नॉलजी ट्रांस्फर के द्वारा सीमैप से उपलब्ध कराई जाएगी। इ. मनोज सेमवाल, वरिष्ठ वैज्ञानिक ने बताया कि यह किट पूरी तरह से औषधीय एवं सगंध पौधों के अव्ययों से बनायी गयी है और पूरी तरह बायोडिग्रेडबल तथा सुरक्षित है। इस किट में दांत, त्वचा, बाल तथा दैनिक स्वच्छता में उपयोग होने वाले उत्पाद रखे गए हैं।
कार्यक्रम के अंत में प्रो. अनिल के त्रिपाठी ने मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथियों को शॉल एवं स्मृति चिन्ह द्वारा सम्मानित किया गया और डॉ ए के शासने द्वारा वोट ऑफ थैंक्स दिया गया।