Thursday, December 13, 2018
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फेफड़ों की इंज्युरी और सूजन का इलाज में स्टेम कोशिकाओं का उपयोग माइटोकॉन्ड्रियल डोनर के रूप में संभव : डॉ अनुराग अग्रवाल

सीडीआरआई में 7वां अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारम्भ

लखनऊ विशेष संवाददाता – सोसाइटी फॉर माइटोकॉन्ड्रिया रिसर्च एंड मेडिसिन की ओर से जानकीपुरम विस्तार स्थित सीडीआरआई में गुरुवार को 7वां अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारम्भ हुआ। तीन दिवसीय इस सम्मेलन में माइटोकॉन्ड्रिया, माइटोकॉन्ड्रियल रोग, उनकी रोकथाम, निदान और उपचार पर विस्तार से चर्चा की गई।

सम्मेलन में इंस्टीट्यूट ऑफ जिनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलॉजी (आईजीआईबी) के निदेशक व प्रो लालजी सिंह मेमोरियल अवार्ड के पहले अवार्डी डॉ अनुराग अग्रवाल ने अपने अवार्ड लेक्चर में स्वांस संबंधी रोगों की पेथोलोजी में माइटोकॉन्ड्रिया की भूमिका पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होने बताया कि

माइटोकॉन्ड्रियल रोग, माइटोकॉन्ड्रिया, जो कोशिका का ऊर्जा घर के नाम से भी जाना जाता है। यह हर कोशिका में मौजूद होता है। माइटोकॉन्ड्रिया जीवन को बनाए रखने और अंगों की कार्यप्रणाली को सुव्यवस्थित बनाए रखने के लिए शरीर द्वारा आवश्यक ऊर्जा का 90फीसदी से अधिक भाग तैयार करती है। माइटोकॉन्ड्रिया में कोई भी विकार मानव में बड़ी संख्या में बीमारियों का कारण बन सकती है। उन्होंने बताया कि फेफड़ों की इंज्युरी और सूजन का इलाज करने के लिए स्टेम कोशिकाओं का उपयोग माइटोकॉन्ड्रियल डोनर के रूप में किया जा सकता है। इससे पहले सीडीआरआई के निदेशक प्रो तपस के कुंडू ने प्रतिनिधियों का स्वागत किया और सीएसआईआर-सीडीआरआई की शोध गतिविधियों के बारे में माइटोकॉन्ड्रिया के महत्व पर प्रकाश डाला। सम्मेलन के आयोजन सचिव डॉ भूपेंद्र सिंह ने सम्मेलन की संरचना के बारे में जानकारी दी। एसएमआरएम के सचिव डॉ के थंगराज ने एसएमआरएम के प्राथमिक उद्देश्यों और गतिविधियों पर प्रकाश डाला था। एसएमआरएम के उपाध्यक्ष डॉ केशव के. सिंह ने माइटोकॉन्ड्रियल रिसर्च के महत्व को साझा किया एवं अपने हालिया काम को प्रस्तुत किया कि कैसे माइटोकॉन्ड्रिया उम्र बढ़ने और चिकित्सा में एक प्रमुख भूमिका निभाता है। प्रोफेसर सत्यमूर्ति, अध्यक्ष, एसएमआरएम ने अपने अध्यक्षीय सम्बोधन में स्वास्थ्य और बीमारी में माइटोकॉन्ड्रिया के महत्व पर प्रकाश डाला। सम्मेलन में भारत के
साथ ही यूएसए, नॉर्वे, डेनमार्क और ताइवान के कुल 18 वैज्ञानिक भी शामिल हुए है। डॉ डी पी सिंह ने धन्यवाद प्रस्ताव दिया।

पहला डॉ लालजी सिंह मेमोरियल लेक्चर अवार्ड डॉ अनुराग अग्रवाल को प्रदान किया गया
डॉ लालजी सिंह जीवविज्ञान के क्षेत्र में एक प्रसिद्ध व्यक्तित्व थे, आनुवंशिकी और जीनोमिक्स के क्षेत्र में उनके योगदान और अथक प्रयासों के कारण, भारत सरकार ने वर्ष 2004 में “पद्मश्री” से सम्मानित किया। डॉ लालजी सिंह ने भारत में डीएनए फिंगरप्रिंटिंग टेक्नोलॉजी की शुरुआत की और हैदराबाद में डीएनए फिंगरप्रिंटिंग एंड डायग्नोस्टिक्स (सीडीएफडी) के लिए केंद्र स्थापित किया। डॉ लालजी सिंह सोसाइटी फॉर माइटोकॉन्ड्रियल रिसर्च एंड मेडिसिन (एसएमआरएम) के पहले अध्यक्ष थे और 2012 तक पद संभाला। डॉ लालजी सिंह की 10 दिसंबर 2017 को असामयिक रूप से अचानक मृत्यु के पश्चात के पश्चात, एसएमआरएम ने अपनी स्मृति में “डॉ लालजी सिंह मेमोरियल लेक्चर अवॉर्ड” की स्थापना की, जिसे एसएमआरएम की वार्षिक बैठकों के दौरान “माइटोकॉन्ड्रियल रिसर्च” के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले शोधकर्ताओं को प्रदान किया जाना सुनिश्चित किया गया। इसी क्रम में पहला डॉ लालजी सिंह मेमोरियल लेक्चर पुरस्कार आईजीआईबी नई दिल्ली के निदेशक डॉ अनुराग अग्रवाल को प्रदान किया गया ।