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खास बात चीत निलांजय तिवारी के संग 13508831_1740688492853269_2571338081617241505_n “नई सोच नई पहल आने वाले कल के लिए” राजेश पाण्डेय 

प्रतिदिन की तरह ही शुक्रवार को अलीगढ के एसएसपी राजेश पाण्डेय संवेदनशील और महत्वपूर्ण मतदान केंद्रों तथा संभावित संवेदनशील ग्रामो के भ्रमण के लिए अलीगढ के ग्रामीण क्षेत्र जवां पहुचे।

 अलीगढ के एसएसपी अति संवेदनशील गाँव रामपुर जवां के प्राथमिक विद्यालय पहुचे। ग्रामीण क्षेत्र में स्थित यह गाँव भी किसी गाँव से भिन्न नहीं था और आश्चर्यजनक बात ये थी की स्कूल में मीटिंग की सूचना के बाद भी कक्षाओ को स्थगित नहीं किया गया। अलीगढ के एसएसपी ने बताया की वो कई दिन से चुनाव संबंधी मतदान केन्द्रो और संबंधी ग्रामो के भ्रमण पर जा रहे थे और ग्रामीण क्षेत्रो के लगभग सभी मतदान केंद्र सरकारी प्राइमरी पाठशाला में स्थित होते हैं तथा भ्रमण के समय सदैव पठन-पाठन का कार्य स्थगित होता है। लेकिन पहली बार सरकारी पाठशाला में क्लास चल रही थी। शिक्षिका उन्हें पढ़ा रही थी और छात्र छात्राएं शांतचित्त होकर अध्ययनरत थे। सरकारी स्कुल के अंदर इतने लोगो की भीड़, नीली बत्तियां और गाड़ियों की भरमार भी उनको विचलित नहीं कर पा रही थी।
एसएसपी से रहा नहीं गया और पूछ लिया पहाड़ाIMG-20170121-WA0034
उन बच्चों पर धमाचौकड़ी का कोई असर क्यों नहीं हो रहा यही सोच रहे एसएसपी कक्षा 5 के बच्चों के पास गए और पुछ लिया की 20 तक का पहाड़ा कितने लोग जानते हैं। तो सभी बच्चों ने हाथ उठाया। एक बच्चा जिसका नाम सूरज था उससे 18 का पहाड़ा सुनाने के लिए कहा तो उसने एक सांस में पूरा सुना दिया।
फिर उन्होंने क्लास की सबसे छोटी बच्ची दया कुमारी से 15 का पहाड़ा पूछा तो उसने भी पूरा बिना रुके बता दिया।
जब जिलाधिकारी से रहा नहीं गया
वहाँ मौजूद जिलाधिकारी से रहा नहीं गया और उन्होंने एक छात्र से अंग्रेजी की पुस्तक निकाल कर पढने को कहा तो छात्र राजकुमार ने सही उच्चारण के साथ व अंग्रेजी के वाक्य को स्पष्ट पढ़कर सुनाया।
*बच्चों के साथ खिचवाई फ़ोटो*  तब एसएसपी से रहा नहीं गया और उन्होंने उन बच्चों के साथ फ़ोटो खिचवाई। बहार निकलते समय एसएसपी ने पूछा इस स्कूल की पढ़ाई  इतनी अच्छी क्यूँ है तो पता चला अध्यापक-प्रधानाध्यापक सभी समय से आते है और बच्चों के साथ पूरी मेहनत करते हैं।
unnamedअलीगढ़ एसएसपी ने कहा
  ऐसी प्रतिभायें विपरीत परिस्थितियों में भी छोटे-छोटे गाँव में विध्दमान हैं जरूरत उन्हें चाक के ऐसे कुम्हार की है जो उन्हें अपने कौशल और सधे हाथों से दीपक की भाँति ढाल दें, जिससे देश, काल और समाज को प्रकाश मिले। उन्होंने कहा की मैं पुनः छोटे से गाँव के प्रतिभा सम्पन्न छात्रों को उनकी मेहनत और लगन के लिए सलाम करता हूँ और उनके अध्यापकों को हृदय से साधुवाद देता हूँ जो सतत् प्रयास कर गाँव की मिट्टी को तपाकर सोना बनाते हैं।
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