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ज़िन्दगी के सफ़र में एक हजारो में मेरी बहना …निलान्जय के संग

निलान्जय Part 2

यादो के अँधेरे मै जब भी अकेला रहता, उसकी याद आती है..
जब भी यारो के बीच खट्टी- मिट्टी बात होती, उसी की याद आती है..
जब भी दिल हार मान जाता है, उसकी सवालो-जवाबो से मन में मुस्कराहट आ जाती है..
जिसने मुझे चलना सिखाया , हसना सिखाया
जब जब भटका मै रोशनी बनकर रास्ता दिखाया उसने ..
जागते सोते अँधेरे से डरा तो उसी की याद आती है ..
हाथो से थप-थपाना चेहरे पर मुस्कान लाना मेरी शरारतो को अनदेखा करना …
बड़ा हो गया तो बचपन की बाते याद आती हैं
जब जब निकला घर से , घर जल्दी आने के लिये आवाज़ लगाती
खेल कूद के बाद मन न लगा पढने में तो डांटती देती है
नटखट था में सर पर हाथ रख प्यार से सब समझती है वो
न निकले दिए कभी आँखों में आंसू , बहन ने प्यार इतना दिया
परवरिश दी इन्सान बनने कि कभी घमंड नही करने दिया
करा उसने इतना उचा नाम अपना, अखबार छपते छपते कम पड़ गए
देखकर अखबारों में नाम उसका आँखें ख़ुशी से भर आती हैं
जिसके साथ मैंने बचपन गुजारा , ज़िन्दगी की राह पर चलना सिखा
उसकी ऊंचाई की बुलंदी देख लोगो की कतारे लगती हैं
जिसको बचपन में चिढ़ाया करता, अब उसके साथ सेल्फी लेने की होढ़ रहती है
 बदल गया ज़माना आगे बड़ने की होड़ में , बदल गए है हम
लगे पड़े ऊचाईयो की रेस में धीरे धीरे दूर होते गये
वो समय था एक पल भी दूर नहीं थे हम
राखी का महत्व बहन का दुलारा भाई समझ सकता है
वो कोई और नहीं, मेरी हजारो में एक बहना

 

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